आँख में इन्फेक्शन को दावत देना है आईलैश एक्सटेंशन करवाना- रिसर्च

एक हालिया वैज्ञानिक रिसर्च में यह सामने आया है कि आईलैश एक्सटेंशन यानी नियमित रूप से नकली पलकें लगवाना आंखों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। इसकी वजह से पलकों की जड़ों में सूक्ष्म कीड़े (माइट्स) पनप सकते हैं, जो आगे चलकर आपकी आंखों की रोशनी और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

स्टडी के मुताबिक, इस ट्रीटमेंट को रेगुलर करवाने वालों को बड़े पैमाने पर आँख से जुड़ी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इन कीड़ों को मेडिकल भाषा में डेमोडेक्स कहा जाता है। ये नकली पलकें लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सूखे ग्लू में जमा होने वाली डेड स्किन सेल्स को खाते हैं, जिससे ये कीड़े तेज़ी से बढ़ सकते हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि इस समस्या के गंभीर नतीजे हो सकते हैं, जिसमें आंखों के आसपास खुजली, स्किन का छिलना और धुंधला दिखना शामिल है। रिसर्च के अनुसार, जो लोग लगातार आईलैश एक्सटेंशन करवाते हैं, उनकी पलकों के फॉलिकल्स यानी जड़ों में ‘डेमोडेक्स फॉलिकुलोरम’ (Demodex folliculorum) नाम के सूक्ष्म कीड़े या पनपने का खतरा बढ़ जाता है।

दुनिया भर में लाखों नकली पलकें लगाने के प्रोसेस किए जाते हैं। इस ट्रीटमेंट में, ब्यूटीशियन ग्लू की मदद से सिंथेटिक फाइबर के धागों को पलकों से जोड़ते हैं, जिससे पलकें घनी और लंबी दिखती हैं। नकली पलकें चिपकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ग्लू की वजह से उस हिस्से को ठीक से साफ करना मुश्किल हो जाता है। यही गंदगी, डेड सेल और ग्लू इन कीड़ों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर देते हैं।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि आंखों के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस ट्रीटमेंट से आंखों की समस्याएं होने के सबूत बढ़ रहे हैं। यूक्रेन में नेशनल पिरोगोव मेमोरियल मेडिकल यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स ने यूरोपियन सोसाइटी ऑफ़ कैटरैक्ट एंड रिफ्रैक्टिव सर्जन्स की 44वीं कांग्रेस में इस ट्रीटमेंट के संभावित नुकसानों के बारे में ज़रूरी सबूत पेश किए।

यह स्टडी ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट डॉ. तात्याना ज़मोद और उनकी टीम ने की थी। इसमें 16 से 28 साल की 345 महिलाओं का सर्वे किया गया कि वे कितनी रेगुलर आर्टिफिशियल पलकें लगाती हैं। लगभग 48 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि ट्रीटमेंट के बाद उन्हें आँखों में किसी तरह का दर्द, लाली या खुजली महसूस हुई। डॉक्टर ज़मूद ने महिलाओं को सलाह दी कि वे दिन में दो बार अपनी पलकों को हल्के क्लींजर और लैश ब्रश से साफ़ करें।

फिर टीम ने उन 25 महिलाओं की पलकों के सैंपल की माइक्रोस्कोप से जाँच की, जो रेगुलर यह ट्रीटमेंट करवाती थीं। इनमें से 24 महिलाओं के सैंपल में डेमोडेक्स माइट्स पाए गए। उनमें से ज़्यादातर में खुजली, जलन, लाली, सूजन, स्किन का छिलना और पलकों का आपस में चिपकना जैसे लक्षण भी थे।

डेमोडेक्स माइट्स बड़ों में आम हैं और आमतौर पर नैचुरली झड़ते हैं, इसलिए वे नॉर्मल हालात में नुकसान नहीं पहुँचाते। लेकिन जब उनकी संख्या एबनॉर्मल तरीके से बढ़ जाती है, तो वे दर्दनाक आँखों का इन्फेक्शन कर सकते हैं।

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