गाजा के पुनर्निर्माण में लग सकते हैं 80 साल और 40 अरब डॉलर- संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक रिपोर्ट में गाजा में इजरायली बमबारी से नष्ट हुए घरों और बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए एक रूट मैप और अनुमान पेश किया है।

गाजा के पुनर्निर्माण में लग सकते हैं 80 साल और 40 अरब डॉलर- संयुक्त राष्ट्र

अंतरराष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट खुलासा करती है कि इजरायली बमबारी से गाजा की हालत चांद की सतह जैसी हो गई है।

यहाँ बीते 7 महीने में 80 हजार से ज्यादा घर मलबे के ढेर बन चुके हैं। रिपोर्ट से पता चलता है कि सभी आवासीय भवनों का 72 फीसदी पूरी तरह से या आंशिक रूप से नष्ट हो गया है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इतने बड़े पैमाने पर की जाने वाली यह पहली कोशिश होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गाजा की ऊंची इमारतें और बुनियादी ढांचे तबाह हो गए हैं, जिनका पुनर्निर्माण कार्य अगली शताब्दी तक संभव होगा और इस काम को करने की अनुमानित लागत लगभग 40 अरब डॉलर है।

संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव अब्दुल्ला अल-दरदारी का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के शुरुआती अनुमान के मुताबिक़ गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण के लिए लागत 30 से 40 अरब डॉलर को पार कर सकती है।

जॉर्डन की राजधानी अम्मान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अब्दुल्ला अल-दरदारी ने कहा कि विनाश का पैमाना बहुत बड़ा और अभूतपूर्व है। यह एक ऐसा मिशन है जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से वैश्विक समुदाय ने नहीं निपटाया है।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि गाजा के सभी नष्ट हुए घरों के पुनर्निर्माण में लगभग 80 साल लगेंगे, जबकि आंशिक पुनर्निर्माण में कम से कम 16 साल लग सकते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गाजा में युद्ध के बाद से गरीबी दर युद्ध से पहले 38.8 प्रतिशत से बढ़कर 60.7 प्रतिशत हो गई है।

कॉन्फ्रेंस में लोगों का घर फिर से बसाने के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आर्थिक, सामाजिक मामलों के साथ इन लोगों के जीवन को सामान्य करने के लिए शीघ्रता से काम किये जाने पर बात की गई। शत्रुता खत्म होने के बाद पहले तीन वर्षों के भीतर इन मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया गया है।

अनुमान के मुताबिक़ बमबारी और विस्फटों से बने मलबे का वज़न कुल 37 मिलियन टन होगा। यह आंकड़ा हर दिन बड़ा हो रहा है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि यह पहले से ही 40 मिलियन टन के करीब पहुंच रहा है।

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