खाड़ी युद्ध के चलते स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में लगभग 20 हज़ार नाविक जहाज़ों पर फँसे हुए हैं। माना जा रहा है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के दौर की यह एक ‘अभूतपूर्व स्थिति’ है यानि पिछले क़रीब आठ दशकों में ऐसा पहली बार हुआ है।
यूएन न्यूज़ के मुताबिक़, ये नाविक तेल और गैस टैंकरों, विशाल नौपरिवहन वाहकों, मालवाहक जहाज़ों के साथ-साथ छह पर्यटक क्रूज़ जहाज़ों सहित लगभग 2 हज़ार जहाज़ों पर काम कर रहे हैं। फ़ारस की खाड़ी में फँसे हुए ये जहाज़ होर्मुज़ के संकीर्ण समुद्री मार्ग से गुज़रने में असमर्थ हैं।
ईरान की सीमा होर्मुज़ का मार्ग उत्तरी हिस्से से लगता है और ईरान का कहना है कि वह केवल “ग़ैर-शत्रु” जहाज़ों को ही वहाँ से गुज़रने की अनुमति देगा। बताते चलें कि युद्ध से पहले, इस जलमार्ग से प्रतिदिन लगभग 150 जहाज़ गुजरते थे, लेकिन अब केवल चार या पाँच ही इस मार्ग से गुज़र पाते हैं।
गौरतलब है कि लन्दन में संयुक्त राष्ट्र के अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, एक महीने पहले युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़ों पर 19 हमले हुए हैं। आईएमओ अन्तरराष्ट्रीय नौपरिवहन की सुरक्षा और संरक्षा में सुधार के उपायों के लिए ज़िम्मेदार, संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है।
यह भी बता दें कि ईरान पर 28 फ़रवरी को इसराइल-अमरीकी बमबारी शुरू होने के बाद से, दस नाविक मारे गए हैं और आठ घायल हुए हैं। यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि उन 19 जहाज़ों को विशेष रूप से क्यों निशाना बनाया गया। हालाँकि, संकट को हल करने के लिए बढ़े हुए राजनयिक क़दमों के बीच, पिछले सप्ताह हमलों में कमी आई है।
अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO), 20 हज़ार नाविकों की निकासी और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है। संगठन के समुद्री सुरक्षा प्रभाग के निदेशक डेमियन शेवेलियर ने कहा है, “आधुनिक युग में इतने सारे नाविकों के फँसने की कोई मिसाल नहीं है। आईएमओ ने युद्ध के सभी पक्षों से हमलों को कम करने की पुकार लगाई है ताकि नाविकों को सुरक्षित निकाला जा सके।”
फ़ारस की खाड़ी में फँसे दो हज़ार जहाज़ों को सऊदी अरब और ओमान से संचालित होने वाली कम्पनियाँ, भोजन, पानी और ईंधन की आपूर्ति कर रही हैं। इन जहाज़ों के लिए बन्दरगाह में रहना सुरक्षित नहीं है, इसलिए वे अपने स्वामित्व वाली शिपिंग कम्पनियों के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, सुरक्षित स्थानों की तलाश में खाड़ी में घूम रहे हैं।
आईएमओ के डेमियन शेवेलियर ने कहा कि संगठन ने ईरान से स्पष्टीकरण मांगा है कि “शत्रु जहाज़” किसे माना जाएगा, जिसे होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने पर हमले का ख़तरा हो सकता है। ध्यान रहे कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य अत्यन्त महत्वपूर्ण है. दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति का अनुमानित 20 प्रतिशत हिस्सा यहीं से होकर गुज़रता है।
1968 में आईएमओ ने क्षेत्र के देशों की सहमति से एक अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत समुद्री जहाज़ मार्ग प्रणाली अपनाई थी। यह प्रणाली दक्षिण में ओमान के क़रीब से गुज़रने वाले संकीर्ण समुद्री गलियारे के माध्यम से सबसे सुरक्षित मार्ग को दर्शाती है।