पहली बार पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया में होगी जनगणना 2027

देश के इतिहास में भारत की अगली जनगणना पहली बार पूर्णतः डिजिटल होगी। पहली अप्रैल 2026 से शुरू होकर 2027 में पूरी होने वाली इस हाईटेक प्रक्रिया में मोबाइल ऐप और एक स्व-गणना पोर्टल का उपयोग किया जाएगा, जिससे नागरिक स्वयं अपनी जानकारी भर सकेंगे। यह जनगणना दो चरणों में होगी, जिसमें पहले चरण (अप्रैल-सितंबर 2026) में मकान सूचीकरण और दूसरे चरण (फरवरी 2027) में जनसंख्या गणना की जाएगी।

भारत में पहली बार पूरी तरह से डिजिटल जनगणना प्रक्रिया के पहले चरण की शुरुआत हो गई। जनगणना 2027 के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना स्व-गणना कार्य पूरा किया। मोबाइल ऐप और स्व-गणना पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे।

सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पर एक पोस्‍ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि उन्होंने अपनी स्व-गणना पूरी कर ली है। पोस्ट में उन्‍होंने लिखा कि मैं भारत के लोगों से अपील करता हूं कि वे अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करें और जनगणना की प्रक्रिया में भाग लें।

इस कवायद को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जनगणना 2027 भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी, जो वर्षों से चली आ रही पारंपरिक कागज-आधारित प्रणाली से हटकर होगी। इसे जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत दो चरणों में संचालित किया जा रहा है।

संबंधित अधिकारियों के मुताबिक़, डेटा सुरक्षा के लिए कड़े उपाय किए गए हैं, डेटा केंद्रों को महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना के रूप में नामित किया गया है और जानकारी का उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

बताते चलें कि इस डिजिटल जनगणना में पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना (एचएलओ)—33 अधिसूचित प्रश्नों के माध्यम से आवास की स्थितियों, संपत्तियों, सुविधाओं और घरेलू विवरणों से संबंधित डेटा एकत्र करने से संबंधित है।

इस चरण में 15 दिनों की समय-सीमा हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में घर-घर जाकर की जाने वाली जनगणना से पहले है। इसका मकसद सटीकता बढ़ाना, गलतियां कम करना और ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

खास बात यह है कि इस पोर्टल द्वारा कई भाषाओं में काम करना संभव होगा। इसमें हिंदी और अंग्रेजी सहित करीब 14 क्षेत्रीय भाषाएं शामिल हैं। इसकी एक खास बात ‘स्व-गणना’ की शुरुआत है। इसके तहत नागरिक एक खास पोर्टल के जरिए अपनी घर-परिवार की जानकारी अपनी मर्जी से ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी है। इस बार जनगणना के लिए कागजी फॉर्मों का उपयोग नहीं किया जाएगा बल्कि इसके स्थान पर गणनाकर्ता स्मार्ट फोन पर मोबाइल ऐप के माध्यम से सीधे डेटा एकत्र और जमा करेंगे। इसके अतिरिक्त, दोनों चरणों में सेल्फ-एन्यूमरेशन के लिए एक ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध होगी।

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