चार सदस्यीय दल के साथ लॉन्च हुआ नासा का मानवयुक्त आर्टेमिस-II चंद्र मिशन

यह नासा का मंगल की ओर बढ़ने से पहले का प्रयास है। अपनी अंतरिक्ष यात्राओं की इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए नासा चंद्रमा पर एक लूनर बेस स्थापित करना चाहता है। इसके अलावा नासा इस दशक के अंत तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मिशनों की योजना बना रहा है।


अमरीका के फ्लोरिडा से नासा का आर्टेमिस II चंद्र मिशन लॉन्च हो गया। चार अंतरिक्ष यात्रियों वाले इस मिशन ने बुधवार को शाम 6:35 बजे (ईस्टर्न समय) नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से प्रक्षेपित किया गया।

पचास से अधिक वर्षों में पहली बार चंद्रमा के चारों ओर मानवयुक्त उड़ान भरी गई। यह आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत नासा का पहला मानवयुक्त मिशन है। इसके चार सदस्यीय दल में नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच इस यात्रा का हिस्सा हैं। साथ ही कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन भी इस टीम में शामिल हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के अनुसार, नासा द्वारा साझा जानकारी में कहा गया है कि इस मिशन का उद्देश्य ओरियन के जीवन-समर्थन प्रणालियों को सत्यापित करना और अंतरिक्ष यात्रियों को आर्टेमिस III और आगामी चंद्र मिशनों की सफलता के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण संचालन का अभ्यास करने का अवसर देना है।

अंतरिक्ष यात्री इस मिशन के दौरान, अंतरिक्ष यान के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के साथ आपातकालीन प्रक्रियाओं का अभ्यास करेंगे। इसके अलावा ये टीम चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से की तस्वीरें लेगी। साथ ही कई ऐतिहासिक उपलब्धियों का भी प्रतिनिधित्व करते हुए इस मिशन में पहली महिला, पहला अफ्रीकी-अमरीकी अंतरिक्ष यात्री और चंद्रमा की ओर यात्रा करने वाला पहला कनाडाई सदस्य भी शामिल है।

हालाँकि लॉन्च काउंटडाउन को टी-10 मिनट के समय पर थोड़ी देर के लिए रोका गया था, जिसके बाद कुछ मिनटों में इसे फिर से शुरू कर दिया गया। आर्टेमिस II मिशन गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए आवश्यक कई क्षमताओं का प्रदर्शन करेगा।

पृथ्वी पर वापसी से पहले यह दल चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से से लगभग 7,400 किलोमीटर आगे तक यात्रा करेगा। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से पहले से कहीं अधिक दूर और चंद्रमा के पहले से कहीं अधिक निकट तक जा सकेंगे। इसमें ख़ास बात यह है कि पिछली आधी शताब्दी में यह पहली बार होगा।

मिशन में री-एंट्री यानी पुनः प्रवेश की प्रक्रिया भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह इस मिशन के सबसे चुनौतीपूर्ण चरणों में से एक है। दरअसल ओरियन के पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 25,000 मील प्रति घंटे की गति से प्रवेश करने की उम्मीद है। ऐसे में उसे लगभग 5,000 डिग्री तापमान का सामना करना पड़ेगा, इसके बाद यह प्रशांत महासागर में उतरेगा।

आर्टेमिस II का उद्देश्य चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति स्थापित करना और अंततः अंतरिक्ष यात्रियों को मंगल ग्रह तक भेजना है। आर्टेमिस कार्यक्रम अपोलो मिशनों के बाद शुरू किया गया है, जिनके तहत 1968 से 1972 के बीच 24 अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजा गया था, जिनमें से 12 ने उसकी सतह पर कदम रखा था।

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