म्यांमार में मिला दुर्लभ माणिक कोहिनूर से 14 गुना विशाल है

म्यांमार के मशहूर जेम माइनिंग इलाके से खनिकों को एक बेहद नायब माणिक पत्थर मिला है। मोगोक में खनिकों को मिले इस माणिक को 11,000 कैरेट का एक दुर्लभ पत्थर बताया जा रहा है। साथ ही इसे देश में मिला दूसरा सबसे बड़ा माणिक (Ruby) भी बताया जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह दुर्लभ रूबी अप्रैल के बीच में, पारंपरिक नए साल के जश्न के तुरंत बाद मिला था। एक्सपर्ट्स ने रूबी का रंग बैंगनी-लाल बताया है, जिसमें हल्के पीले रंग के शेड्स हैं। पत्थर की चमक, ट्रांसपेरेंसी और हाई क्वालिटी इसे दुनिया के सबसे रेयर जेमस्टोन में से एक बनाती है।

रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि यह कीमती पत्थर म्यांमार के ऊपरी इलाके मांडले के पास मोगोक में मिला है, जो दुनिया भर में कीमती पत्थरों की माइनिंग के लिए मशहूर है। म्यांमार दुनिया के 90% रूबी का उत्पादन करता है। ऐसे में यह खोज देश की रत्न-समृद्ध विरासत को फिर से उजागर करती है।

रिपोर्ट्स से यह भी पता चलता है कि इस रूबी का वज़न करीब 2.2 किलोग्राम है, जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालांकि यह 1996 में मिले 21,450 कैरेट के रूबी से छोटा है, लेकिन इसका रंग और क्वालिटी इसे ज़्यादा कीमती बनाती है।

अगर इसे कोहिनूर के मुक़ाबले में देखें तो पते हैं कि उसका वर्तमान वजन 105 कैरेट से कुछ अधिक है। लेकिन, मूल रूप से ये हीरा 793 कैरेट का था। यदि उस आकार से तुलना करें तो म्यांमार में मिला हीरा उससे भी 14 गुना विशाल है।

गौरतलब है कि मोगोक इलाका म्यांमार में चल रहे सिविल वॉर और ज़ोरदार झड़पों की वजह से भी खबरों में रहा है, लेकिन इस बड़ी खोज ने एक बार फिर ग्लोबल ज्वेलरी इंडस्ट्री का ध्यान इस इलाके की ओर खींचा है। मोगोक के रूबी दुनिया में सबसे महंगे होते हैं। सबसे उच्च गुणवत्ता वाले रत्नों की कीमत करोड़ों डॉलर तक पहुंच जाती है।

म्यांमार की सरकार ने इसकी सही कीमत बताए बिना कहा कि हालांकि यह 1996 में इसी इलाके में मिले 21,450 कैरेट के एक और रूबी से छोटा है। पिछले दिनों मिला यह पत्थर अपने बेहतरीन रंग, चमक और बेहतर गुणवत्ता के कारण ज्यादा कीमती माना जा रहा है।

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