ट्रंप ने पिछले दिनों एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें कुछ पेटेंट दवाओं और संबंधित दवा सामग्री के आयात पर शत प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की गई है।
पेटेंट वाली दवाओं पर नए अमरीकी टैरिफ का भारत पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। जानकारों के मुताबिक़, भारत मुख्य रूप से अमरीका को सस्ती जेनेरिक दवाएं निर्यात करता है। फिलहाल ये जेनेरिक दवाएं टैरिफ से मुक्त हैं।
जानकारों का कहना है कि स्पेशल दवाएं या पेटेंट वाली दवाओं के लिए कच्चा माल बनाने वाली भारतीय कंपनियों को दबाव का सामना करना पड़ सकता है यदि भविष्य में जेनेरिक दवाओं पर भी टैरिफ लागू हो जाते हैं। ऐसे में अनिश्चितता की स्थिति जन्म लेने की सम्भवना जताई गई है।
ट्रंप के इस फैसले पर जीटीआरआई यानी ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कदम ने भारत को काफी हद तक सुरक्षित रखा है, क्योंकि अमरीका को कम लागत वाली जेनेरिक दवा निर्यात में भारत का दबदबा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मरिका में इस्तेमाल होने वाली दवाओं में जेनेरिक दवाओं की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक है और फिलहाल इन्हें शुल्क से छूट दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक़, वर्ष 2025 में भारत ने अमरीका को 9.7 अरब डॉलर मूल्य की दवाओं का निर्यात किया, जो उसके 25.8 अरब डॉलर के कुल वैश्विक औषधि निर्यात का 38 प्रतिशत है।
मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि जीटीआरआई के फाउंडर अजय श्रीवास्तव ब्रांडेड या विशिष्ट उपयोग वाली दवाएं बनाने वाली भारतीय कंपनियां या पेटेंट दवाओं के लिए कच्चे माल की आपूर्ति करने वाली कंपनियों को इस शुल्क के दबाव का सामना करने की बात कहते हैं। उनके अनुसार, यदि शुल्क का दायरा जेनेरिक दवाओं तक बढ़ाया जाता है तो भविष्य को लेकर अनिश्चितता और बढ़ सकती है।
गौरतलब है कि मुख्य रूप से आयरलैंड, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, बेल्जियम, डेनमार्क, ब्रिटेन और जापान जैसे देश सौ प्रतिशत शुल्क से प्रभावित होंगे। ये देश अमरीका को पेटेंट और उच्च मूल्य वाली दवाओं के प्रमुख निर्यातक हैं।