हाल ही में हुई एक स्टडी से पता चला है कि नई पीढ़ी (Gen Z) पासवर्ड के मामले में अपने बड़ों से पिछड़ी हुई है और उनकी आदतें सबसे खराब हैं। एक रिसर्च में पाया गया है कि 2025 में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले पासवर्ड ‘qwerty’, ‘123456’, ‘admin’, ‘password’ और ‘India@123’ हैं।

ऑनलाइन पासवर्ड मैनेजमेंट फर्म NordPass की सिक्योरिटी आदतों पर हाल ही में की गई एक स्टडी से पता चला है कि Gen Z यानी 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए लोग के बाद पैदा हुए लोग) पिछली किसी भी पीढ़ी की तुलना में पासवर्ड इस्तेमाल करने में कमज़ोर हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय काफी कमजोर और अनुमान लगाए जाने वाले पासवर्ड का इस्तेमाल करते हैं।
पासवर्ड मैनेजर NordPass की एक रिपोर्ट से पता चला है कि Gen Z के बीच सबसे पॉपुलर पासवर्ड ‘12345’ है, जबकि हैरानी की बात है कि सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाले पासवर्ड में ‘पासवर्ड’ शब्द 5वें और ‘स्कीबॉडी’ 7वें स्थान पर है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सालों के अवेयरनेस कैंपेन के बावजूद, पासवर्ड की आदतों में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।
पासवर्ड मैनेजर नॉर्डपास ने 44 देशों के यूजर्स की ओर से उपयोग किए जाने वाले पासवर्ड का विश्लेषण किया। भारत में ‘123456’ लगातार दूसरे वर्ष सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला पासवर्ड बन गया है। इस साल सबसे आम पासवर्ड में 123456, admin, 12345678, 123456789, 12345, passwordAa123456, 1234567890, pass@123, और admin123 शामिल हैं।यह जानकारी बुधवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई।
इसके उलट, बेबी बूमर्स यानी जो 1946 और 1964 के बीच पैदा हुए, के बीच सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला पासवर्ड ‘123456’ था, जो Gen Z के बीच सबसे पॉपुलर पासवर्ड से थोड़ा ज़्यादा सिक्योर है। यही पासवर्ड मिलेनियल्स और जेनरेशन X के बीच भी सबसे ज़्यादा पॉपुलर था।
रिसर्चर का कहना है, “हम आम तौर पर यह मान लेते हैं कि क्योंकि युवा पीढ़ी डिजिटल दुनिया में बड़ी हुई है, इसलिए वे स्वाभाविक रूप से साइबर सिक्योरिटी में बेहतर हैं, लेकिन हमारी रिसर्च इस गलतफहमी को दूर करती है।”
रिपोर्ट के मुताबिक, यही ट्रेंड इस साल की शुरुआत में पासवर्ड मैनेजमेंट टूल बिटवर्डन द्वारा किए गए एक ग्लोबल सर्वे में भी सामने आया था, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, जापान, यूके और उस में हज़ारों काम करने वाले एडल्ट्स का सर्वे किया गया था।
हालांकि, रिसर्च से पता चलता है कि कमज़ोर पासवर्ड इस्तेमाल करने के बावजूद, Gen Z तेज़ी से पासकी, बायोमेट्रिक्स और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसे ज़्यादा एडवांस्ड सिक्योरिटी तरीके अपना रहा है।











