पूर्व अनुमानों के अनुसार, अनुमान था कि भारत 2030 और 2035 के बीच प्रतिस्थापन स्तर से नीचे की प्रजनन दर तक पहुंच जाएगा, लेकिन देश ने यह उपलब्धि लगभग 2020 में ही हासिल कर ली।
भारत की गिरती जन्मदर ने अरबपति एलन मस्क को चिंता में डाल दिया है। उनका मानना है कि घटती प्रजनन दर मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है। हालाँकि अभी तक इस तर्क के फोकस में उनकी चेतावनियां जापान और दक्षिण कोरिया जैसी बूढी आबादी वाले देशों के लिए थीं। मगर अब उन्होंने अपना ध्यान दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत की ओर केंद्रित किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एलन मस्क ने अपने विचार साझा करते हुए लिखा, ‘भारत की जन्म दर प्रतिस्थापन दर से नीचे गिर गई है। सबसे अधिक शिक्षित लोगों में भारत की जन्म दर कई साल पहले ही प्रतिस्थापन दर से नीचे गिर गई थी।’
सामान्यतः 2.1 की प्रजनन दर को प्रतिस्थापन स्तर माना जाता है। यह बताता है कि बिना प्रवास के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जनसंख्या को बनाए रखने के लिए प्रत्येक महिला को औसतन इतने बच्चे पैदा करने चाहिए। जबकि आंकड़े बताते हैं कि भारत की वर्तमान प्रजनन दर इस सीमा से नीचे है।
मस्क के इस बयान ने भारत के जनसांख्यिकीय भविष्य पर बहस को फिर से नया रुख दे दिया है। जहाँ पिछले कई दशकों से भारत एक तीव्र जनसंख्या वृद्धि वाले देश के रूप में जाना जाता रहा है और इसे जुड़ी चिंताएं चर्चा का विषय हुआ करती थीं वहीँ अब इस घटती प्रजनन दर और देश के दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण नई चर्चा के विषय होंगे।
1950 में भारत की जनसंख्या लगभग 36 करोड़ थी और आज यह लगभग 14.5 करोड़ है। यह संख्या विश्व की कुल आबादी का लगभग एक-छठा हिस्सा है। साल 2023 में चीन को पछाड़ते हुए भारत दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश बना। इस बीच जन्मदर के नए आंकड़े बताते हैं कि इस समय भारत एक बिल्कुल अलग चुनौती का सामना कर रहा है।
भारत की प्रजनन दर:की बात करें तो संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की विश्व जनसंख्या रिपोर्ट 2025 के अनुसार, देश की कुल प्रजनन दर वर्तमान में प्रति महिला 1.9 जन्म है। यह स्थिर जनसंख्या बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से कम है।
हालाँकि अलग अलग राज्यों के मिलने वाले आंकड़े देखें तो पता चलता है कि केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अब प्रजनन दर 1.6 और 1.8 के बीच है। यह संख्या जापान, जर्मनी और इटली जैसी वृद्ध विकसित अर्थव्यवस्थाओं में देखी जाने वाली दरों के समान है।
वहीँ इसके उलट बिहार में प्रति महिला लगभग 3.0 बच्चों के साथ देश की सबसे उच्च प्रजनन दर बनी हुई है। अगले नंबर पर उत्तर प्रदेश है। यहाँ यह दर राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक यानी लगभग 2.4 है।
इस औसत गिरावट को अपेक्षा से अधिक बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर डेमोग्राफिक रिसर्च के जनसांख्यिकी विशेषज्ञ मोरध्वज धाकड़ ने द इंडियन एक्सप्रेस को जानकारी दी है कि पहले के अनुमानों के अनुसार भारत 2030 और 2035 के बीच प्रतिस्थापन स्तर से नीचे की प्रजनन दर तक पहुंच जाएगा, लेकिन देश ने यह उपलब्धि लगभग 2020 में ही हासिल कर ली।