भारत जल्द ही पेट्रोलियम पदार्थों का आयात बंद कर देगा- नितिन गडकरी

नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि भारत जल्द ही पेट्रोलियम पदार्थों का आयात करना बंद कर देगा। गडकरी ने यह बात नीति आयोग की ओर से मेथेनॉल इकॉनमी पर आयोजित एक कार्यक्रम में अपने भाषण के दौरान कही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पेट्रोलियम ईंधन के विकल्पों को विकसित करने पर ध्यान दे रही है, जिससे भारत की पेट्रोलियम ईंधन के लिए अन्य देशों पर निर्भरता घटेगी और जल्द ही हम आयात करना बंद कर देंगे।

Nitin-Gadkari

इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत वर्तमान में कच्चे तेल के आयात पर 4.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। बीते कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के चलते यह खर्च कम हुआ है। पहले भारत क्रूड आॅयल के निर्यात पर 7.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करता था। गडकरी ने कहा कि ईंधन का आयात कम करने के लिए केंद्र सरकार एथेनॉल,मेथेनॉल और बायो सीएनजी के विकल्पों पर ध्यान देकर उन्हें विकसित कर रही है।

उन्‍होंने इस दौरान कृषि के विविधिकरण पर जोर देने की बात कही। क्‍योंकि खेती से ही इन प्रोडक्‍ट को प्राप्‍त किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘मौजूदा समय में सामाजिक आर्थिक हालात ठीक नहीं है, कृषि में अब भी बहुत समस्‍याएं हैं। यही कारण है कि देशभर में किसान आत्‍महत्‍या कर रहे हैं। लेकिन, सरकार कृषि में विविधिकरण लाकर किसानों की हालत सुधारना चाहती है।’

गडकरी ने कहा कि सरकार उन विकल्पों पर ज्यादा ध्यान दे रही है, जो किसानों की नजर में अमूमन बेकार होते हैं। इनमें धान और गेहूं का भूसा शामिल है। सरकार भूसे से एथेनॉल बनाने की तैयारी में है। उन्होंने यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां धान के एक टन भूसे से 400 लीटर एथेनॉल प्राप्‍त किया जा रहा है। हम इसी तरह की तकनीक भारत में भी विकसित कर रहे हैं। साथ ही बांस से भी एथेनॉल प्राप्त करने पर काम किया जा रहा है।  गडकरी ने बांस से इथेनॉल प्राप्त करने के लिए भारत के नॉर्थ ईस्‍ट इलाके को बहुत फायदा होने की बात कही। उन्होंने कहा कि इथेनॉल बनाने के लिए हम नॉर्थ ईस्ट राज्यों में उपलब्ध बांस का इस्तेमाल कर सकते हैं, इससे वहां के किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार लाया जा सकता है। गडकरी ने कहा कि ऐसे ही कई विकल्‍प हैं जिनसे बायो डीजल और कई तरह के ईंधन प्राप्‍त किए जा सकते हैं। इससे भारत का लगभग 5 लाख करोड़ रुपए बच सकेगा।

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