अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रतिबंध लगाने की धमकियों के बावजूद, भारत का कहना है कि वह रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद रूस से तेल आयात करने के कारण भारत अमरीका और यूरोपीय संघ के निशाने पर है। वास्तव में, भारत ने रूस से आयात करना इसलिए शुरू किया क्योंकि संघर्ष शुरू होने के बाद पारंपरिक आपूर्ति यूरोप की ओर मोड़ दी गई थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। साथ ही भारत सरकार द्वारा तेल कंपनियों को रूस से आयात कम करने का निर्देश नहीं दिया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत पर ‘और अधिक टैरिफ़’ लगाने की धमकी दी तो भारत ने भी देर रात अमरीका का नाम लेकर प्रतिक्रिया दी। भारत ने जवाब में ट्रंप की धमकी को ‘अनुचित और तर्कहीन’ बताया है। मंत्रालय की ओर से आगे यह भी कहा गया उस समय संयुक्त राज्य अमरीका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता को मजबूत करने के लिए भारत द्वारा इस तरह के आयात को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया था।
गौरतलब है कि भारत फिलहाल रूसी तेल के सबसे बड़े ख़रीदारों में शामिल है। जहां साल 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद कई यूरोपीय देशों ने व्यापार घटाया और ऐसे में भारत रूस के लिए एक अहम बाज़ार बन गया। इस समय रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, भारत की कुल आपूर्ति का लगभग 35 प्रतिशत पूरा करता है।
फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ़ ऑफ स्टाफ़ स्टीफन मिलर का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा है कि भारत द्वारा रूस से तेल ख़रीदकर यूक्रेन युद्ध को फ़ाइनेंस करना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में संकेत दिया था कि रूस से हथियार और तेल खरीदने पर भारत पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगेंगे, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि भारत रूस के साथ क्या करता है।
शुक्रवार को ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने सुना है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक संवाददाता सम्मेलन में डोनाल्ड ट्रंप की धमकी पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि रूस के प्रति नीति में कोई बदलाव नहीं होगा।
रणधीर जायसवाल ने कहा- “विभिन्न देशों के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंध अपने-अपने गुणों पर आधारित हैं और इन्हें किसी तीसरे देश के नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। भारत और रूस के बीच एक मज़बूत और विश्वसनीय साझेदारी है।”
याद दिला दें कि इससे पहले, 30 जुलाई को भी ट्रंप ने भारत पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाने की घोषणा की थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि भारत अगर रूस से सैन्य उपकरण और तेल की ख़रीद जारी रखता है, तो मौजूदा टैरिफ़ के अलावा जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
ट्रंप की आलोचना का जवाब देते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमरीका और यूरोपीय संघ ख़ुद रूस के साथ व्यापार जारी रखे हुए हैं। मंत्रालय ने पिछले साल अमरीका द्वारा कड़े प्रतिबंधों के बावजूद रूस के साथ अनुमानित 3.5 अरब डॉलर के माल व्यापार की बात कही। यूरोप-रूस व्यापार में न केवल ऊर्जा, बल्कि उर्वरक, खनन उत्पाद, रसायन, लोहा और इस्पात, और मशीनरी एवं परिवहन उपकरण भी शामिल हैं।
संयुक्त राज्य अमरीका की बात करते हुए मंत्रालय ने कहा कि वह अपने परमाणु उद्योग के लिए रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, अपने ईवी उद्योग के लिए पैलेडियम, साथ ही उर्वरक और रसायनों का आयात करना जारी रखे हुए है।
इस पृष्ठभूमि में, भारत को निशाना बनाना अनुचित और तर्कहीन बताते हुए भारत का कहना है कि किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तरह, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
