उत्तर प्रदेश के कानपुर में सात पिचों वाला स्टेडियम तैयार होने के करीब है। करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस स्टेडियम का 90 प्रतिशत कर पूरा हो गया है।

कानपुर शहर गंगा किनारे सिविल लाइंस एरिया में बसे ऐतिहासिक ग्रीनपार्क स्टेडियम के बाद अब अब यहां एक और स्टेडियम तैयार किया जा रहा है। नया बनने वाला क्रिकेट स्टेडियम कल्याणपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज युनीवर्सिटी में बन रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ यह देश का दूसरा ऐसा स्टेडियम होगा जहां सात क्रिकेट पिच बनाई गई हैं। देश में अहमदाबाद में बने नरेंद्र भाई मोदी स्टेडियम में नौ पिचें हैं।
ईटीवी की एक खबर के मुताबिक़, सीएसजेएमयू में बनने वाले स्टेडियम में पिचों का काम करीब 90 प्रतिशत कर पूरा हो गया है। ग्रीनपार्क के पिच क्यूरेटर शिव कुमार अपनी टीम के साथ इन पिचों को तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा बीसीसीआई के पिच क्यूरेटर आशीष भौमिक इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। पिचों और स्टेडियम की जांच पड़ताल के बाद इसे बीसीसीआई मानकों के अनुरूप बताया गया है।
स्टेडियम की पिचों की बात करें तो यहाँ की सेन्ट्रल पिच, महाराष्ट्र की लाल मिट्टी से बन रही है। बाएं व दाएं ओर की पिच को ओडिशा के कालाहांडी की काली कपास मिट्टी और उन्नाव की काली मिट्टी से बनाया गया है। प्रैक्टिस पिच के लिए काली और लाल मिक्स मिट्टी का प्रयोग किया गया है।
खबर में यह भी कहा गया है कि अब जो कानपुर में अंतरराष्ट्रीय मैच होंगे उनमें टीम इंडिया और विपक्षी टीम के जो खिलाड़ी होंगे वह सीएसजेएमयू के इस स्टेडियम में नेट प्रैक्टिस भी कर सकेंगे।
प्रदेश के क्रिकेट खिलाडियों को सीएसजेएमयू की इन सात पिचों से कई फायदे मिलेंगे। क्रिकेटर्स जब रणजी ट्रॉफी जैसे अन्य टूर्नामेंट खेलने जाते हैं तो किसी राज्य में उन्हें लाल मिट्टी की पिच मिलती है तो किसी में काली मिट्टी वाली। मगर अब जब क्रिकेटर्स कानपुर में सभी तरह की मिट्टी में तैयार पिचों पर अभ्यास कर लेंगे तो उन्हें दूसरे राज्यों में पिच को समझने के साथ बेहतर प्रदर्शन करने में सुविधा मिलेगी।
स्टेडियम के इंफ्रास्ट्रक्चर और डेकोरेशन पर भी ख़ास ध्यान दिया गया है। खबर के मुताबिक़, इस स्टेडियम में जहां पर्थ स्टेडियम जैसा ड्रेनेज सिस्टम होगा वहीं, इंग्लैंड के लार्ड्स स्टेडियम की तर्ज पर बरमूडा घास लगाई जाएगी। बेहतर ड्रेनेज सिस्टम से मैदान जहां आधे घंटे में सूख जाएगा। वहीं, उच्च गुणवत्ता वाली घास से आउटफील्ड बेहतर होगी।
