भारत-यूएई के बीच 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य: विदेश मंत्रालय

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के दौरे को दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डेढ़ घंटे के इस आधिकारिक दौरे को विदेश मंत्रालय ने ख़ास बताते हुए दोनों नेताओं का संयुक्त बयान जारी किया। इस बीच कई अहम दस्तावेजों के आदान-प्रदान के अलावा विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर भी हुए।

भारत-यूएई के बीच 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान से पहले यात्रा को लेकर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यूएई के राष्ट्रपति ने अभी-अभी नई दिल्ली की अपनी आधिकारिक यात्रा पूरी की है। यह एक छोटी, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण यात्रा थी।

नेताओं की मौजूदगी में कई डॉक्यूमेंट्स का भी आदान-प्रदान हुआ। इस यात्रा का महत्व यूएई के राष्ट्रपति के साथ आए प्रतिनिधिमंडल की बनावट से समझा जा सकता है। इसमें अबू धाबी और दुबई दोनों के शाही परिवारों के सदस्य, और कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल थे।

विदेश सचिव ने जानकारी देते हुए कहा कि व्यापार के मोर्चे पर, 2022 में दोनों देशों के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होने के बाद से, द्विपक्षीय व्यापार 100 बिलियन डॉलर को पार कर गया है। इसे देखते हुए, दोनों नेताओं ने लक्ष्य को बढ़ाने और 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 बिलियन डॉलर करने का फैसला किया। यह भी तय किया गया कि एमएसएमई उद्योगों के निर्यात को पश्चिम एशियाई, अफ्रीकी और यूरेशियाई क्षेत्रों में आसान बनाया जाएगा।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सहयोग के लिए प्राथमिकता वाला क्षेत्र बताया गया। भारत में यूएई की पार्टनरशिप से एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने पर सहयोग करने का फैसला किया गया। यूएई भारत में डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश पर भी विचार करेगा।

रक्षा क्षेत्र में सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए भी दोनों देशों ने एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर काम करने का फैसला किया है। साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र में भी बड़े समझौते हुए। भारतीय संस्था इन-स्पेस और यूएई स्पेस एजेंसी के बीच एक समझौता हुआ है। इस पहल के तहत दोनों देश मिलकर नए लॉन्च कॉम्प्लेक्स, सैटेलाइट बनाने की फैक्ट्रियां, संयुक्त अंतरिक्ष मिशन और ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करेंगे।

गुजरात के धोलेरा को लेकर सबसे बड़ा निवेश समझौता हुआ है। जिसके तहत यूएई गुजरात के धोलेरा में बन रहे ‘स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन’ के विकास में भागीदार बनेगा। इस समझौते के बाद धोलेरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पायलट ट्रेनिंग स्कूल, विमानों की मरम्मत के लिए एमआरओ (एमआरओ) सेंटर, नया बंदरगाह (ग्रीनफील्डपोर्ट) और स्मार्ट टाउनशिप जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

इस बीच रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे। साथ ही दोनों देशों ने एडवांस्ड न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में साझेदारी पर विचार करने का फैसला किया है, जिसमें बड़े न्यूक्लियर रिएक्टर और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर का डेवलपमेंट और डिप्लॉयमेंट, साथ ही एडवांस्ड रिएक्टर सिस्टम, न्यूक्लियर पावर प्लांट ऑपरेशन, मेंटेनेंस और न्यूक्लियर सेफ्टी में सहयोग शामिल है।

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