स्वतंत्रता दिवस पर लखनऊ के कुकरेल पिकनिक स्पॉट में वंदे मातरम वाटिका का विस्तार किया जाएगा। यहां अशोक चक्र का निर्माण किया गया है। इसके 24 स्पोक्स के बाहरी हिस्से में अशोक के पौधे लगाए जाएंगे। इस पौधारोपण कार्यक्रम में सेवानिवृत्त और कार्यरत भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के साथ समाज के अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे।
स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक महत्व को उत्तर प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने प्रयास कर रही है। इस प्रयास में ‘वंदे मातरम वाटिका’ के जरिए हर जिले में 150 पौधों का रोपण किया जाएगा। यह एक तरफ जहाँ वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने की याद दिलाता है वहीँ लोगों को प्रकृति की सुरक्षा के लिए भी प्रेरित करने में सहायक होगा।
इस स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी जिलों में ‘वंदे मातरम वाटिका’ विकसित करने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इसके लिए वन विभाग को विशेष वन क्षेत्रों को विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है। वन विभाग की ओर से विकसित की जाने वाली इन वाटिकाओं में छायादार, फलदार और पर्यावरण के लिए उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अवध वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी सितांशु पांडेय से मिली जानकारी में कहा गया है कि स्वतंत्रता दिवस पर लखनऊ के कुकरेल पिकनिक स्पॉट में वंदे मातरम वाटिका का विस्तार किया जाएगा। इस पौधारोपण कार्यक्रम में सेवानिवृत्त और कार्यरत भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के साथ समाज के अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे।
वन अधिकारी ने आगे बताया कि यहां अशोक चक्र का निर्माण किया गया है। इसके 24 स्पोक्स के बाहरी हिस्से में अशोक के पौधे लगाए जाएंगे। पौधों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र के चारों ओर फेंसिंग की भी व्यवस्था की जाएगी।
इस वर्ष देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस वर्ष 15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का विशेष महत्व है। इसी अवसर को यादगार बनाने के लिए प्रत्येक जिले में ‘वंदे मातरम वाटिका’ तैयार की जाएगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रत्येक जिले में सरकार की इस पहल पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत 150 पौधे लगाए जाएंगे। वंदे मातरम वाटिका को केवल पौधारोपण स्थल के तौर पर ही नहीं बल्कि देशभक्ति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाले विशेष क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही इसके लिए लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
सरकार के मुताबिक़, स्थानीय लोगों की भागीदारी की बदौलत पौधों की देखभाल की जिम्मेदारीसे सुनिश्चित करने की योजना है। स्थानीय लोगों को इस अभियान से जोड़ने से पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण लंबे समय तक संभव हो सकेगा।
पर आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के अलावा स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों के छात्र, गैर-सरकारी संगठन, सामाजिक संगठन, स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार, एनसीसी और एनएसएस के सदस्य शामिल होंगे। साथ ही युवा एवं महिला मंगल दल, कार्यरत और सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी तथा विभिन्न सरकारी विभाग भी पौधारोपण अभियान में शामिल होंगे।