खुशहाल पारिवारिक जीवन डिमेंशिया के खतरे को 66 फीसद तक कम कर सकता है-रिसर्च

चीन में जेरियाट्रिक डिज़ीज़ के लिए नेशनल क्लिनिकल रिसर्च सेंटर द्वारा की गई और मेडिकल जर्नल अल्ज़ाइमर एंड डिमेंशिया में छपी स्टडी में कहा गया है कि नतीजों से पता चलता है कि पारिवारिक रिश्तों की क्वालिटी डिमेंशिया के खतरे का पता लगाने में एक ज़रूरी फैक्टर हो सकती है।

मानसिक गिरावट यानी डिमेंशियाचीन से जुड़ा एक बेहद कारगर और सरल इलाज सामने आया है। चीन में हाल ही में हुई एक स्टडी के मुताबिक, खुशहाल पारिवारिक जीवन डिमेंशिया के खतरे को काफी कम कर सकता है।

यह स्टडी ‘अल्ज़ाइमर एंड डिमेंशिया’ जर्नल में छपी है, जिसमें कहा गया है: ‘इन नतीजों से पता चलता है कि डिमेंशिया के खतरे का आकलन करते समय पारिवारिक रिश्तों की गुणवत्ता एक अहम पहलू हो सकती है।’

नतीजों से पता चला कि पारिवारिक रिश्तों से संतुष्ट होने के मुकाबले, असंतुष्ट होने पर डिमेंशिया का खतरा 34 प्रतिशत ज़्यादा होता है। बहुत ज़्यादा असंतुष्ट होने पर यह खतरा 66 प्रतिशत ज़्यादा होता है।

रिसर्चर्स का इस संबंध में कहना है कि ज़्यादातर लोग घर में शांति और खुशहाली चाहते हैं। यह साबित हो चुका है कि यह मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद है। रिसर्चर की रिपोर्ट से यह बात भी सामने आई है कि, सामाजिक माहौल से नाखुशी का डिमेंशिया के खतरे से कोई खास संबंध नहीं था।

रिसर्चर्स के मुताबिक, दुखी पारिवारिक रिश्तों की वजह से डिमेंशिया का खतरा 66% तक बढ़ जाता है। इस बारे में, एक्सपर्ट्स ने यूके में 104,093 लोगों के डेटा का एनालिसिस किया, जिनकी उम्र 40 से 69 साल के बीच थी और जो इस स्टडी के पहले चार सालों में डिमेंशिया से सुरक्षित थे।

इन लोगों पर 13 साल से ज़्यादा समय तक नज़र रखी गई, इस दौरान 1,359 लोगों में डिमेंशिया का पता चला। साइंटिस्ट्स ने बीमारी के खतरे की तुलना पारिवारिक रिश्तों और दोस्ती से मिलने वाले संतोष से की। पार्टिसिपेंट्स से पूछा गया कि वे अपने पारिवारिक रिश्तों और सोशल माहौल से कितने खुश हैं।

नतीजों से पता चला कि जो लोग अपने पारिवारिक रिश्तों से नाखुश थे, उनमें डिमेंशिया का खतरा उन लोगों की तुलना में 34 प्रतिशत ज़्यादा था जो संतुष्ट थे। जबकि जो लोग बहुत नाखुश थे, उनमें यह खतरा 66 प्रतिशत ज़्यादा था।

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