हर साल बर्बाद हो रहा है एक अरब टन भोजन

हर वर्ष 30 मार्च को ‘शून्य भोजन भोजन बर्बादी दिवस’ मनाया जाता है। इस दिन को मनाए जाने का मक़सद भोजन की बर्बादी को रोकने और खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल समझदारी से करने के बारे में जागरूकता बढ़ा है। भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए विश्व एजेंसियों का नारा है – आइए यह सुनिश्चित करें कि हमारे भोजन को महत्व दिया जाए, उसे बर्बाद नहीं किया जाए।


दुनिया भर में भोजन की बर्बादी का स्तर बेहद चौंकाने वाला है। सालाना करीब एक अरब टन खाने योग्य भोजन बर्बाद होता हैं। ज़रा सोचें कि इस एक अरब टन भोजन से कितने करोड़ भूखे लोगों का पेट भर सकता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 14 दिसम्बर 2022 को, अपने 77वें सत्र में, हर साल 30 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस (International Day of Zero Waste) के रूप में मनाने का प्रस्ताव अपनाया था।

तुर्कीये ने 105 अन्य देशों के साथ मिलकर यह प्रस्ताव पेश किया था। इससे पहले इसी तरह के कुछ अन्य प्रस्ताव भी पारित किए गए हैं, जिनमें प्रदूषण पर केन्द्रित अन्य उच्च-स्तरीय निर्णय भी शामिल है।

यूएन की एक रिपोर्ट बताती है कि भोजन की इस बर्बादी के पैमाने को इस रूप में भी समझा जाता है कि इनसानों के खाने के लिए कुल जितना भोजन उपलब्ध होता है, उसमें से बर्बाद कर दिए जाने वाले भोजन की मात्रा लगभग 20 प्रतिशत यानि पाँचवाँ हिस्सा है।

उसे ज़्यादा अफ़सोस की बात यह है कि भोजन की इस बर्बादी का प्रभाव इंसानों के साथ पर्यावरण पर भी पड़ता है।

यहाँ भी खाने की बर्बादी का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा, घरेलू स्तर पर होता है। शेष लगभग 40 प्रतिशत भोजन बर्बादी, मुख्य रूप से खाद्य सेवा और खुदरा क्षेत्र में होती है, जो उत्पादन, वितरण और उपभोग सहित कमज़ोर खाद्य प्रणालियों का परिणाम है।

इस मुद्दे से निपटने के लिए यह दिवस इस बात पर ज़ोर देता है कि खाद्य प्रणालियों को फिर से तैयार करने की आवश्यकता है, ताकि दक्षता, लचीलेपन और स्थिरता पर आधारित अधिक टिकाऊ नज़रिये की तरफ़ बढ़ा जा सके।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस मुहिम को सफल बनाने के लिए हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। सबके मिलकर काम करने से भोजन की बर्बादी को पूरी तरह से रोकना यानि शून्य-बर्बादी (zero-waste) के लक्ष्य को हासिल करना सम्भव है।

इसके लिए सरकारें जलवायु और जैव विविधता योजनाओं के साथ-साथ चीज़ों को बार-बार प्रयोग करने का चलन बढ़ाने पर ज़ोर दे सकती हैं।
अपशिष्ट, खाद्य प्रणाली, कृषि और शहरी विकास पर राष्ट्रीय नीतियों के माध्यम से खाद्य बर्बादी की रोकथाम को आगे बढ़ाना और मापन व निगरानी को बढ़ावा देना भी कारगर उपाय है।
सार्वजनिक-निजी भागीदारी को करते हुए ‘भोजन बर्बादी को रोकने की कोशिश एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
व्यवसायों से उम्मीद की जा सकती है कि खाद्य बर्बादी में कमी के मापने योग्य लक्ष्य निर्धारित करना और उन्हें मौजूदा स्थिरता प्रतिबद्धताओं (sustainability commitments) में एकीकृत करने पर ध्यान दें।
रीसायकलिंग प्रणालियों की ओर बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखलाओं में दक्षता सुधारने के लिए नवाचार करना।
समाधानों के विस्तार और प्रगति को साझा करने के लिए खाद्य बर्बादी को रोकने की पहलों के साथ जुड़ना।
इसके अलावा उपभोक्ताओं की ज़िम्मेदारी बनती है कि खाद्य बर्बादी को कम करने और संसाधनों को बचाने के लिए समझदारी से भोजन की योजना बनाना, ख़रीदारी करना, भंडारण करना और भोजन तैयार करने पर फोकस करें।
खाद्य रीसायकलिंग, पुनर्वितरण और खाद बनाने (composting) की पहलों का समर्थन करना भी सहायक होगा।
दैनिक कार्यों के माध्यम से, खाद्य बर्बादी को सामाजिक रूप से अस्वीकार्य बनाने में मदद करना।

इस अन्तरराष्ट्रीय दिवस के माध्यम से भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए पहलों को बढ़ावा देने से, सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा के सभी लक्ष्यों और उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है, जिनमें सतत विकास लक्ष्य 11और सतत विकास लक्ष्य 12 शामिल हैं।

ये लक्ष्य सभी प्रकार के कूड़े – कचरे (अपशिष्ट) पर केन्द्रित हैं जिनमें भोजन की बर्बादी और नुक़सान, प्राकृतिक संसाधनों का दोहन और इलैक्ट्रॉनिक कचरा (E-Waste ) शामिल हैं।

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