नए वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि खाने में नमक की मात्रा बढ़ाने से प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित होती है, जिसका असर दिमाग पर पड़ सकता है और नतीजे में अवसाद बढ़ सकता है।

चीन के नाननिंग विश्वविद्यालय के डॉक्टर शी जुनशेंग के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि भोजन में नमक का कम सेवन मानसिक बीमारियों को रोकने में मदद करता है, जबकि नमक का सेवन बढ़ाने से एक विशिष्ट प्रकार का प्रोटीन, IL-17A बढ़ जाता है। इसका सीधा संबंध अवसाद से होता है।
डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्या की वजह से लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित होती है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार दुनियाभर में करीब 5 फीसदी वयस्क डिप्रेशन की समस्या से जूझ रहे हैं।
डिप्रेशन आमतौर पर जीवन की भीषण घटनाओं, अत्यधिक तनाव और जेनेटिक फैक्टर्स के कारण होता है। डिप्रेशन को लेकर एक चौंकाने वाली स्टडी सामने आई है। स्टडी बताती है कि ज्यादा नमक वाली डाइट से भी लोग डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं।
नानजिंग विश्वविद्यालय की टीम ने इस अध्ययन में यह भी पाया कि विशिष्ट प्रकार की कोशिकाएं (प्रतिरक्षा कोशिकाएं – गामा डेल्टा कोशिकाएं) लगभग 40% IL-17A के उत्पादन में भूमिका निभाती हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों इस पात पर भी सहमति जताई कि आधुनिक पश्चिमी आहार में नमक का अत्यधिक प्रयोग बढ़ रहा है। बाहर के फास्ट फूड में कभी-कभी घर के मुकाबले सौ गुना अधिक नमक होता है।
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनियाभर में लगभग 90% लोग जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन कर रहे हैं। एक दिन में वयस्कों को 5 ग्राम से कम नमक का सेवन करना चाहिए।
नमक की अधिकता से हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकता है। खासकर हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे रहे लोगों की नमक का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।
