माँ और बढ़ रहे बच्चे के बीच ब्रेस्ट ग्लैंड एक अहम कड़ी का काम करती है: अध्ययन

माँ का दूध स्तन ग्रंथियों (mammary gland) के काम करने के तरीके और बच्चे के विकास से उनके संबंध को समझने का एक ज़रिया है। स्तन ग्रंथि की अहम भूमिका के बावजूद, यह अभी भी ठीक से नहीं समझा जा सका है कि इसके काम करने का तरीका दूध की बनावट को कैसे तय करता है और यह बदलाव बच्चे के विकास से कैसे जुड़ा है।

एनवाईयू ग्रॉसमन स्कूल ऑफ़ मेडिसिन के रिसर्चर्स की एक स्टडी में माँ के दूध में ऐसे मॉलिक्यूलर पैटर्न की पहचान की गई, जो माँ के पोषण, स्तन ग्रंथि की बायोलॉजी और बच्चे के विकास को आपस में जोड़ते हैं।

रिसर्चर्स ने भौगोलिक और पोषण के लिहाज़ से अलग-अलग तरह की माताओं के समूहों से इकट्ठा किए गए माँ के दूध से हज़ारों मॉलिक्यूलर माप का विश्लेषण किया। उन्होंने दूध की बनावट में ऐसे पैटर्न पहचाने जो माँ के पोषण और बच्चे के विकास, दोनों से जुड़े थे। साथ ही, उन्होंने यह भी पता लगाने की कोशिश की कि क्या ये पैटर्न स्तन ग्रंथि के काम करने के तरीके के बारे में भी जानकारी दे सकते हैं।

‘साइंस’ जर्नल में आठ अक्टूबर को ऑनलाइन पब्लिश हुई इस स्टडी में स्तन ग्रंथि के काम करने के तीन आपस में जुड़े पहलुओं की जांच की गई। दूध में मौजूद मॉलिक्यूलर पैटर्न को बायोलॉजिकल प्रक्रियाओं से जोड़कर, रिसर्चर्स ने न सिर्फ़ यह पता लगाने की कोशिश की कि दूध में क्या-क्या मौजूद है, बल्कि यह भी समझने की कोशिश की कि दूध की बनावट उस स्तन ग्रंथि के काम करने के तरीके के बारे में क्या बता सकती है जो उसे बनाती है।

माँ के दूध में हज़ारों पोषक तत्व, मेटाबोलाइट्स, प्रोटीन, इम्यून फ़ैक्टर और दूसरे मॉलिक्यूल होते हैं, लेकिन रिसर्च में अक्सर इन घटकों की जांच एक-एक करके की गई है, न कि एक इंटीग्रेटेड बायोलॉजिकल सिस्टम के तौर पर।

स्टडी की सीनियर लेखक और एनवाईयू ग्रॉसमन स्कूल ऑफ़ मेडिसिन में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर लियाट शेनहाव ने कहा, “माँ का दूध हमें दूध बनाने वाली स्तन ग्रंथि की बायोलॉजी को समझने का एक अनोखा और बिना किसी चीर-फाड़ वाला (non-invasive) ज़रिया देता है।”

शेनहाव ने कहा, ‘स्टडीज़ से पता चलता है कि माँ का दूध न तो एक जैसा रहता है और न ही यह सिर्फ़ इस बात पर निर्भर करता है कि माँ क्या खाती है। कुछ चीज़ें माँ के न्यूट्रिशन के हिसाब से बदलती हैं, जबकि कुछ चीज़ें स्थिर रहती हैं या ब्रेस्ट ग्लैंड के अंदर की बड़ी बायोलॉजिकल स्थितियों को दिखाती हैं।’

आगे वह कहती हैं कि अलग-अलग तरह की आबादी में मॉलिक्यूलर पैटर्न को देखकर, हम स्तन ग्रंथि के काम करने के समान गुणों की पहचान कर सकते हैं और यह समझ सकते हैं कि माँ के पोषण और मेटाबोलिक स्थिति का दूध की बनावट और बच्चे के विकास से क्या संबंध है।

इस अध्ययन के लिए कनाडा, पाकिस्तान और बुर्किना फासो के तीन समूहों से लिए गए 1,543 माँ के दूध के नमूनों पर काम किया गया। रिसर्च करने वालों ने कई मॉलिक्यूलर लेयर्स, जैसे मेटाबोलाइट्स, प्रोटीन, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (जैसे विटामिन), मैक्रोन्यूट्रिएंट्स (जैसे कार्बोहाइड्रेट) और ह्यूमन मिल्क ओलिगोसैकेराइड्स, को ग्रोथ डेटा और कंप्यूटेशनल तरीकों के साथ मिलाया। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का एक रूप, मशीन लर्निंग भी शामिल है।

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