अंडमान और निकोबार प्रशासन ने ग्रेट निकोबार और लिटिल अंडमान में निजी क्षेत्र के सहयोग से ‘ग्रीन’ एआई डेटा सेंटर विकसित करने से जुड़ा ईओआई (Expression of Interest) तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं।
इस फैसले के पीछे ‘प्रशासनिक कारणों’ का हवाला दिया गया है। द हिंदू की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वापसी ऐसे समय में हुई है जब ग्रेट निकोबार द्वीप समूह की स्थानीय निकोबारी आबादी ने कहा है कि उन्हें जीएनआई के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में डेटा सेंटर स्थापित करने की ऐसी किसी भी योजना के बारे में सूचित नहीं किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक़, 10 अगस्त को ईओआई प्रकाशित होने के कुछ दिनों बाद जारी एक नोटिस में कहा गया है कि ‘प्रशासनिक कारणों’ से तत्काल प्रभाव से ईओआई वापस लिया जा रहा है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह प्रशासन ने निजी क्षेत्र के नेतृत्व में एक ग्रीन एआई डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए व्यवहार्यता प्रस्ताव आमंत्रित करने हेतु जारी किए गए अपने रुचि पत्र (ईओआई) को केवल चार दिन के भीतर वापस ले लिया है।
इसमें ग्रेट निकोबार के कैंपबेल बे, एंडरसन बे, विजय नगर बे, गांधी नगर बे और लिटिल अंडमान के हटबे व नेताजी नगर के समुद्री क्षेत्र शामिल थे। गौरतलब है कि स्थानीय निकोबारी आबादी का कहना है कि उन्हें जीएनआई के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में डेटा सेंटर स्थापित करने की ऐसी किसी भी योजना के बारे में सूचित नहीं किया गया था। बताते चलें कि जीएनआई के स्थानीय लोग पहले से ही सरकार की प्रस्तावित 91,000 करोड़ रुपये की विशाल परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।