बचपन की यादें दोहराएं तो हम में से ज़्यादातर लोगों ने टेनिस बॉल के साथ क्रिकेट खेला होगा। िकी एक वजह यह भी है कि क्रिकेट खेलते समय टेनिस बॉल को रोकना क्रिकेट बॉल से अधिक आसान महसूस होता है।

टेनिस की इस गेंद को हाथ में लें तो पाते हैं कि इसके सरफेस पर नन्हे बारीक रेशे होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उस पर छोटे-छोटे बाल क्यों होते हैं?
अगर आप कभी टेनिस मैच देखें, तो आपने ज़रूर देखा होगा कि हर खिलाड़ी नई गेंद लेने के बाद उसे ध्यान से देखता है और फिर आप भी ज़रूर सोचेंगे कि खिलाड़ी गेंद को इतनी बारीकी से क्यों देखते हैं?
दरअसल खिलाड़ी गेंद को नहीं, बल्कि टेनिस बॉल पर लगे छोटे-छोटे बालों को देखते हैं। इन बालों को ‘नैप’ कहते हैं और ये निर्माण प्रक्रिया के दौरान दबाव वाली रबर बॉल को ढके रहते हैं।
ऊन, नायलॉन, कपास या इन तीनों के मिश्रण से बने ये छोटे-छोटे बाल गेंद की सतह पर वायुगतिकीय घर्षण (aerodynamic friction) को बढ़ाते हैं और उसके नीचे गिरने की गति को धीमा कर देते हैं।
जब कोई खिलाड़ी गेंद फेंकता है, तो उसकी गति 150 मील प्रति घंटा होती है, लेकिन जब वह प्रतिद्वंद्वी के रैकेट से टकराती है, तो घर्षण के कारण उसकी गति घटकर 50 मील प्रति घंटा रह जाती है।
ये छोटे बाल गेंद के पीछे एक प्रकार की हवा बनाते हैं जो उसे बैकस्पिन या टॉपस्पिन करने में मदद करती है, और फिर उसकी गति का अनुमान लगाना असंभव हो जाता है।
क्यूंकि क्रिकेट गेंद का द्रव्यमान टेनिस गेंद से अधिक होता है। चूँकि उनकी गति समान है, इसलिए क्रिकेट की गेंद का संवेग (speeds) अधिक है। अधिक संवेग का अर्थ है अधिक बल या उसे रोकने में अधिक समय। इसलिए, भारी क्रिकेट गेंद की तुलना में हल्की टेनिस गेंद को रोकना आसान है। या कह सकते हैं कि टेनिस बॉल को रोकना क्रिकेट बॉल से अधिक आसान होता है।
गेंद का यह स्वरुप एक बार में विकसित नहीं हुआ है बल्कि 1800 के दशक में टेनिस गेंदों को इन बालों की बजाय गर्म ऊनी कपड़े से ढका जाता था। बाद में इस गेंद पर इन छोटे बालों का इस्तेमाल गेंद पर होने लगा।









