नेपाल में सोशल मीडिया बवाल के बीच जाने भारत का कानून

सोशल मीडिया पर बैन तथा कथित राजनीतिक भ्रष्टाचार मामले में नेपाल की राजधानी काठमांडू में युवाओं और पुलिस के बीच झड़प हुई। मामला इतना बढ़ गया कि देशभर में कुल 19 लोगों की मौत हो गई। इन दंगो और मौत की आलोचना के बाद गृह मंत्री रमेश लेखक ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है।

नेपाल में सोशल मीडिया बवाल के बीच जाने भारत का कानून

नेपाल से आने वाली यह तस्वीरें भारत के दो पडोसी देशों की याद दिला रही हैं। इनमें पिछले साल बांग्लादेश में हुआ आंदोलन और दूसरा साल 2022 में श्रीलंका में सरकार के ख़िलाफ़ लोगों द्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन एक बार फिर से चर्चा में है।

पिछले सप्ताह नेपाल सरकार ने ऐसे 26 प्लेटफ़ॉर्म पर प्रतिबंध लगा दिया था जिनमें व्हाट्सऐप सहित फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम जैसे कई सोशल मीडिया और मैसेजिंग माध्यम आते हैं। इस समय दुनिया भर में सोशल साइट को लेकर चर्चा चल रही है। ऐसे में यह जानना ज़रूरी है कि भारत में इससे जुड़ा कानून क्या है?

भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए मां-बाप की सहमति की जरूरत होती है। इससे पहले, कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की न्यूनतम आयु 13 वर्ष थी, लेकिन अब माता-पिता की सहमति ज़रूरी है।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के अनुसार इस संबंध में सरकार की तरफ से सोशल मीडिया कंपनियों को देश के क़ानूनों का पालन करने, स्थानीय दफ़्तर खोलने और ग्रीवांस अधिकारी नियुक्त करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था।

टिकटॉक जो चीनी सोशल मीडिया कंपनी है, उसने इन शर्तों का पालन समय पर कर लिया जिससे टिकटॉक पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया। इस प्लेटफार्म की मदद से आयोजकों ने टिकटॉक पर वीडियो साझा करते हुए युवाओं से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की।

ख़ास बात यह है कि इन प्रदर्शनों का कोई केंद्रीय नेतृत्व नहीं है, इसके बावजूद कई युवा समूह भीड़ जुटाने में सफल हुए और प्रशासन से टक्कर ली। इनमे नेपाल के काठमांडू, पोखरा और इटहरी शहर के छात्रों के अलावा स्कूली बच्चों को भी मार्च में शामिल होते देखा जा सकता है।इनका कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध से पढ़ाई प्रभावित हुई है। इस प्रतिबंध के कारण ऑनलाइन क्लासेज़ और पढ़ाई की सामग्री उन तक नहीं पहुंच पा रही है।

इन प्रदर्शन करियों की मांगें हैं कि सरकार सोशल मीडिया से तुरंत प्रतिबंध हटाए और ‘भ्रष्ट कार्यप्रणाली’ को तुरंत रोका जाए। हालात को काबू करने के लिए प्रशासन को कई जगहों पर कर्फ़्यू लगाना पड़ा। इस बीच नेपाल के सूचना मंत्री ने संकेत दिए हैं कि सोशल मीडिया बैन के फ़ैसले पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

मैसेजिंग ऐप और सोशल मीडिया पर बैन के कारण नेपाल में बड़ी संख्या में रहने वाले विदेशी नागरिकों को परिवार से संपर्क करने में दिक़्क़तें आ रही हैं। नेपाल से बाहर रहने वाले लोग भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं। नेपाल सरकार में सूचना मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरूंग का कहना है कि सोशल मीडिया प्रतिबंध के फ़ैसले पर पुनर्विचार करने को लेकर चर्चा चल रही है।

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