ईरान और इजरायल के बीच की जंग शनिवार 21 जून को नवें दिन में प्रवेश कर गई। दोनों ओर से एक-दूसरे पर हवाई हमले जारी हैं। फिलहाल अभी तक अमरीका सीधे युद्ध में शामिल नहीं है। वहीँ इसके पीछे भारी आर्थिक खर्च और कूटनीतिक पहल बताया जा रहा है। क्यूंकि युद्ध एक खर्चीला सौदा और इसमें भागीदारी का मतलब है हर दिन अरबों रुपये खर्च किए जाएं।

दोनों तरफ से हमला रिहायशी इलाकों में भी हो रहा है जिसके नतीजे में आम लोगों को कीमत चुकानी पड़ रही है। एक और इजरायल की मिसाइलें ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों और इंडस्ट्रियल एरिया पर निशाना साध रही हैं तो जवाब में ईरान की मिसाइलों से इजरायल का हॉस्पिटल भी चपेट में आया है।
ऐसे में अभी तक सीजफायर की कोई सम्भावना नजर नहीं आ रही है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि हम ईरान से बात करेंगे, देखते हैं नतीजा क्या होता है? आगे उन्होंने कहा कि वह बातचीत से पहले युद्ध विराम चाहते हैं।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड यह सुझाव देने में गलत थीं कि ईरान के परमाणु हथियार बनाने का कोई सबूत नहीं है।
यहाँ सवाल उठता है कि क्या अमरीका जंग में शामिल होने जा रहा है। व्हाइट हाउस के अनुसार- “नेगोशिएशन की संभावना” के कारण, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले दो सप्ताह के भीतर फैसला करेंगे कि अमरीका, इजरायल-ईरान संघर्ष में शामिल होगा या नहीं?
दूसरी तरफ तेहरान के परमाणु कार्यक्रम और जंग को समाप्त करने पर बातचीत के लिए ईरान के विदेश मंत्री आज जिनेवा में फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक करने वाले हैं।
मीडिया से बात करते हुए अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इसे रोकना बहुत मुश्किल होगा, इजरायल ठीक जा रहा है, ईरान कम अच्छा जा रहा है।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड यह सुझाव देने में गलत थीं कि ईरान के परमाणु हथियार बनाने का कोई सबूत नहीं है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इजरायल के पास ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म करने की क्षमता नहीं है, ईरान में जमीनी सेना उतारना ही अंतिम समाधान होगा।















