नदी के पानी में मौजूद जहरीली धातुएं और बच्चों की सेहत से जुड़े एक अध्ययन में बड़ी ही जोखिम भरी चेतावनी सामने आई है। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में बेटवा और यमुना नदियों के संगम पर किया गया अध्ययन बताता है कि बड़ों की तुलना में बच्चों को ज्यादा खतरा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जानकारों का कहना है कि बच्चों में इन धातुओं के संपर्क से होने वाला स्वास्थ्य जोखिम ज़्यादा है। खासकर यहाँ पाए गए आर्सेनिक, लेड और कैडमियम जैसे तत्व गंभीर बीमारियों की वजह बन सकते हैं। अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह पीने के पानी की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने करीब दस हज़ार अलग-अलग परिस्थितियों का सिमुलेशन करते हुए यह पता लगाया कि अलग-अलग हालात में जोखिम कितना बढ़ सकता है। शोध से यह भी पता चला कि बच्चों में नॉन-कार्सिनोजेनिक यानी गैर-कैंसर के जोखिम काफी ज्यादा है और कई मामलों में यह सुरक्षित सीमा से ऊपर भी पाया गया। वहीं यह बात भी सामने आई कि आर्सेनिक से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ़ पेलियोसाइंस द्वारा किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने किया ने नदी के पानी के नमूनों की जाँच की। वैज्ञानिकों ने इन नमूनों में मौजूद धातुओं और उनके प्रभाव का भी विश्लेषण किया।
वैज्ञानिकों ने मानव गतिविधियों को इस प्रदुषण का सबसे बढ़ा कारण बताया है। इनमें खेती से निकलने वाले कचरे के अलावा औद्योगिक अपशिष्ट, शहरी सीवेज और बिना शुद्ध किया गया गंदा पानी इस प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं।
नतीजों के आधार पर विशेषज्ञों की ओर से सुझाव दिया गया है कि बेटवा-यमुना संगम क्षेत्र में भारी धातुओं के प्रदूषण को प्राथमिकता से नियंत्रित किये जाने की जरूरत है।