लखनऊ में सीजी सिटी में सेंस थीम पर बनेगा अर्बन पार्क

लखनऊ कैंसर अस्पताल के समीप ग्रीन बेल्ट पर अर्बन पार्क-द गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज का निर्माण कराया जाएगा। इस निर्माण की बदौलत प्रदेश की राजधानी का सीजी सिटी क्षेत्र जल्द ही एक नई पहचान के साथ विकसित होने जा रहा है। कैंसर अस्पताल के पास ग्रीन बेल्ट की जमीन पर विकसित होने वाले इस अर्बन पार्क की लागत करीब 28 करोड़ रुपये होगी।

लखनऊ में सीजी सिटी में सेंस थीम पर बनेगा अर्बन पार्क

कैंसर अस्पताल के पास ग्रीन बेल्ट की करीब 20 एकड़ जमीन पर अर्बन पार्क-द गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज का निर्माण कराया जाएगा। इस बड़े क्षेत्रफल में विकसित होने वाले इस पार्क में शहर की पहली ग्रीन रूफ लाइब्रेरी बनेगी। इसके अलावा करीब एक एकड़ के क्षेत्रफल में वॉटर बॉडी और जॉगिंग ट्रैक सहित स्पोर्ट्स एरीना का भी निर्माण होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुतबिक, लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने गुरुवार को इस जगह का दौरा करने के बाद यहाँ फाइव सेंस थीम के आधार पर निर्माण के निर्देश दिए हैं। प्रथमेश कुमार का कहना है कि इस पार्क में लाइब्रेरी का भी निर्माण कराया जा रहा है। यह शहर की पहली ग्रीन रूफ लाइब्रेरी होगी, जिसकी आकर्षक डिजाइन लोगों का ध्यान खींचेगी।


इस पार्क को गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज के नाम से जाना जाएगा। फाइव सेंस थीम पर आधारित इस पार्क में अलग-अलग यंत्र लगाए जाएंगे। इसके जरिये बच्चे दृश्य, स्पर्श, ध्वनि, गंध और स्वाद क्रियाओं को महसूस कर सकेंगे।


जानकारी के मुताबिक़, इस पार्क में करीब 600 मीटर लंबा जॉगिंग ट्रैक एवं पाथ-वे विकसित किया जाएगा। इसके अलावा ओपन जिम और बच्चों के लिए आकर्षक झूले वाला किड्स-प्ले एरिया होगा। साथ ही यहां स्पोर्ट्स एरीना भी विकसित किया जाएगा। इसमें बैडमिंटन, बास्केटबॉल, टेनिस कोर्ट, बॉक्स क्रिकेट की सुविधा होगी।

गौरतलब है कि यह स्पोर्ट्स एरीना पार्क के किनारे विकसित किया जाएगा, जिससे बाहर से आने वाले लोग भी एरीना में सीधे एंट्री ले सकें। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अर्बन पार्क में लगभग एक एकड़ क्षेत्रफल में वॉटर बॉडी विकसित की जाएगी, जिसके किनारे फ्रैगरेंस गार्डन होगा। साथ ही करीब 300 लोगों की क्षमता का एम्फी थियेटर और फूड कोर्ट भी निर्मित किया जाएगा।

इस पार्क को गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज के नाम से जाना जाएगा। फाइव सेंस थीम पर आधारित इस पार्क में अलग-अलग यंत्र लगाए जाएंगे। इसके जरिये बच्चे दृश्य, स्पर्श, ध्वनि, गंध और स्वाद क्रियाओं को महसूस कर सकेंगे।

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