हर वर्ष आज यानी 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस मनाया जाता है। वैसे तो रेडियो एक सदी पुराना अविष्कार है, लेकिन यह सामाजिक संपर्क का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसकी मदद से आपदा राहत और आपातकालीन प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त होता है।

विश्व रेडियो दिवस 2026 थीम विश्व रेडियो दिवस की थीम’ रेडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक उपकरण है, आवाज नहीं है, जो प्रसारण जगत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
यूनेस्को ने 3 नवंबर 2011 के दिन 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस के रूप में घोषित किया था, जिसे 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया। यह 1946 में संयुक्त राष्ट्र रेडियो की स्थापना की याद में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य रेडियो के महत्व को बढ़ावा देना है।
साल 1900 में एक विशाल रेडियो संचारित अल्टरनेटर का निर्माण शुरू हुआ। फेसेन्डेन ने उच्च-आवृत्ति स्पार्क ट्रांसमीटर के साथ प्रयोग करते हुए 23 दिसंबर 1900 को लगभग 1.6 किलोमीटर (0.99 मील) की दूरी पर सफलतापूर्वक भाषण प्रसारित किया। यह पहला ऑडियो रेडियो प्रसारण था ।
वैसे तो भारत में सन 1927 तक कई रेडियो क्लब की स्थापना हो चुकी थी, लेकिन उससे पहले भी अनाधिकृत रूप से मुंबई, कोलकाता और मद्रास में रेडियो प्रसारण किया जा रहा था। साल 1936 में इंपोरियल रेडियो ऑफ इंडिया की शुरुआत हुई और आगे चलकर जिसका नाम ‘ऑल इंडिया रेडियो’ रखा गया।
1939 के वर्ष में द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत होने पर भारत में भी रेडियो के सारे लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। दरअसल यह वह समय था जब यहां भी सरकार ने ट्रांसमीटर को जमा करने के आदेश दे दिए थे।
रेडियो आमजन में जागरूकता बढ़ाने और प्रसारकों के बीच नेटवर्किंग को मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। तकनीक की दुनिया में बड़े-बड़े बदलावों के बावजूद आज भी रेडियो का महत्व बरक़रार है। रेडियो का सबसे महत्वपूर्ण योगदान कोविड-19 महामारी के दौरान देखने को मिला जब गलत सूचना के खिलाफ लड़ने में इसने अहम योगदान दिया।
