एचआईवी के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई इस समय आर्थिक दबाव का सामना कर रही है

हर साल पहली दिसंबर को ‘विश्व एड्स दिवस’ मनाया जाता है। आज का दिन एचआईवी-एड्स के खिलाफ एक विश्वव्यापी संघर्ष का प्रतीक है। यूएनएड्स (UNAIDS) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत में 25 लाख से अधिक लोग एचआईवी से संक्रमित हैं, जो वैश्विक स्तर पर तीसरी सबसे बड़ी एचआईवी महामारी का हिस्सा है।

एचआईवी के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई इस समय आर्थिक दबाव का सामना कर रही है

इस साल वर्ल्ड एड्स डे 2025 का थीम है ‘व्यवधान पर विजय, एड्स प्रत्युत्तर में सुधार’ (Overcoming disruption, transforming the AIDS response) थीम के साथ मनाया जा रहा है, जो बताती है कि एड्स से जुड़ी शर्म, डर और सामाजिक दूरी को खत्म करना कितना जरूरी है।

विश्व एड्स दिवस की शुरुआत साल 1988 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने की थी। ‘विश्व एड्स दिवस’ से पहले यूएन एजेंसी ने अपनी एक नई रिपोर्ट जारी की है। आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) के अनुसार, 2023 की तुलना में 2025 के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अन्य देशों से प्राप्त होने वाली रक़म में 30-40 प्रतिशत की कमी दर्ज की जा सकती है।


यूएनएड्स ने चेतावनी दी है कि रोकथाम कार्यक्रमों में व्यवधान आने की वजह से अब उनके लिए स्थिति और नाज़ुक हो जाएगी। इस गिरावट का उन निम्न- और मध्य-आय वाले देशों पर गम्भीर असर हुआ है, जो एचआईवी से बड़े पैमाने पर प्रभावित हैं।


यूएनएड्स के अनुमान के अनुसार, एचआईवी रोकथाम प्रयासों को फिर से बहाल करने के प्रयास यदि विफल रहे तो 2025 से 2030 के दौरान, एचआईवी संक्रमणों के 33 लाख से अधिक अतिरिक्त मामले दर्ज किए जा सकते हैं।

संकट से मानवाधिकारों पर जोखिम गहराया
यूएन एजेंसी की कार्यकारी निदेशक विनी ब्यानयिमा ने जिनीवा में बताया कि इस धन संकट की वजह से यह उजागर हो गया है कि कड़ी मेहनत से अब तक दर्ज की गई प्रगति कितनी नाज़ुक है।

एचआईवी/एड्स के विरुद्ध लड़ाई के लिए धनराशि का संकट एक ऐसे समय में नज़र आ रहा है, जब नागरिक समाज पर सख़्तियाँ बढ़ रही हैं और हाशिए पर रह रहे समूहों को निशाना बनाकर अमल में लाए जा रहे दंडात्मक क़ानूनों में उछाल देखा गया है। ये समुदाय, एचआईवी से सर्वाधिक प्रभावितों में हैं।

एचआईवी के विरुद्ध लड़ाई में उन संगठनों की विशेष भूमिका है, जिन्हें स्थानीय स्तर पर समुदायों के नेतृत्व में संचालित किया जाता है, मगर अब उन्हें भी दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि इस रिपोर्ट में हर एक आँकड़े के पीछे ऐसे लोग हैं जिनमें छोटे बच्चे हैं जिनकी एचआईवी जाँच नहीं हो पाई। इनमे वह युवा महिलाएँ और समुदाय हैं जो रोकथाम के लिए समर्थन से दूर हो हैं। विनी ब्यानयिमा सवाल करती है कि हम उन्हें इस हाल में नहीं छोड़ सकते हैं।

रोकथाम सेवाओं पर गहरा असर
यूएन एड्स के अनुसार, एचआईवी रोकथाम, परीक्षण व सामुदायिक नेतृत्व में संचालित कार्यक्रमों में व्यापक स्तर पर व्यवधान दर्ज किया गया है। उदाहरण के महिलाओं की अगुवाई वाले 60 प्रतिशत से अधिक संगठनों ने बताया है कि उन्हें अति-आवश्यक सेवाएँ स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

कार्रवाई की पुकार
यूएनएड्स ने एचआईवी के विरुद्ध अब तक हासिल की गई प्रगति को बिखरने से बचाने के लिए विश्व नेताओं से आग्रह किया है। इसमें कहा गया है कि वैश्विक एकजुटता व बहुपक्षवाद में भरोसे को फिर से पुष्ट करना होगा। इनमें वे संकल्प भी हैं, जिन्हें दक्षिण अफ़्रीका में जी20 नेताओं की शिखर बैठक के दौरान व्यक्त किया गया।

एचआईवी के लिए धनराशि का स्तर बनाए रखना होगा और उसमें वृद्धि करनी होगी, विशेष रूप से उन देशों में जोकि बाहरी सहायता पर सबसे अधिक निर्भर हैं। साथ ही नवाचार में निवेश करना होगा और रोकथाम उपायों को क़िफ़ायती बनाना होगा।

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