सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे पत्र में आयोग ने कहा कि इंटरनेट संपर्कता वाले क्षेत्रों में वेबकास्टिंग की जाएगी। हालांकि, जहां पर इंटरनेट सुविधा नहीं है उन क्षेत्रों में वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी आदि की वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है।

इस वर्ष के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और यह पहला राज्य होगा जहां 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग लागू की जाएगी।
दरअसल चुनाव में मतदान प्रक्रिया की निगरानी बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके लिए सभी मतदान केंद्रों पर शत प्रतिशत वेबकास्टिंग का निर्णय लिया, जो वर्तमान में 50 फीसद है।
वेबकास्टिंग इंटरनेट पर किसी कार्यक्रम या प्रस्तुति का सीधा प्रसारण है। हालांकि, वेबकास्टिंग चुनाव प्राधिकरण के आंतरिक उपयोग के लिए होगी।
निर्वाचन आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजे हैं जिसमें कहा गया है कि इंटरनेट संपर्कता वाले क्षेत्रों में वेबकास्टिंग की जाएगी। ऐसे में जिन जगहों पर इंटरनेट सुविधा नहीं है उन क्षेत्रों में वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी आदि की उपयुक्त वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती है।
आयोग द्वारा भेजे इस पत्र में आगे कहा गया- “राज्य स्तर, जिला स्तर और विधानसभा क्षेत्र स्तर पर भी वेबकास्टिंग निगरानी नियंत्रण कक्ष होगा, जिसकी देखरेख और निगरानी प्रत्येक स्तर पर नियुक्त नोडल अधिकारी द्वारा की जाएगी।”
मतदान आयोग ने मतदान दिवस की गतिविधियों की निगरानी करते समय यह सुनिश्चित किए जाएगा कि सभी मतदान केंद्रों को दिन में कई बार पर्याप्त समय के लिए लाइव देखा जाए ताकि कार्यवाही का बारीकी से निरीक्षण किया जा सके।
हालांकि अभी तक 50 फीसद मतदान केन्द्रों और महत्वपूर्ण मतदान केन्द्रों पर ही वेबकास्टिंग की जाती रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मतदान प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। सभी राज्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखे निर्वाचन आयोग के पत्र में कहा कि इसके लिए नियंत्रण कक्षों में पर्याप्त कर्मचारी तैनात किए जाने चाहिए।
दिसंबर 2024 में सरकार ने चुनाव नियमों में बदलाव करते हुए कुछ इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों जैसे सीसीटीवी कैमरा, वेबकास्टिंग फुटेज और उम्मीदवारों की वीडियो रिकॉर्डिंग के सार्वजनिक निरीक्षण पर रोक लगा दी थी। जिससे उनके गलत इस्तेमाल पर पाबन्दी कागै जा सके।
केंद्रीय विधि मंत्रालय ने निर्वाचन आयोग की सिफारिश के आधार पर, चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 93 में संशोधन किया। जिससे सार्वजनिक निरीक्षण के लिए उपलब्ध कागजात या दस्तावेजों के प्रकार को प्रतिबंधित किया जा सके।











