बारूदी सुरंगों से मुक्ति के साथ निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक मुहिम

दुनिया भर में निरस्त्रीकरण प्रयासों को बढ़ावा देने और बारूदी सुरंगों के दंश को दूर करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने जल्द ही एक वैश्विक अभियान की शुरुआत करने की घोषणा की है।

बारूदी सुरंगों से मुक्ति के साथ निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक मुहिम

सोमवार को यूएन के शीर्षतम अधिकारी ने अपने एक वक्तव्य में इस पहल के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के कई सदस्य देशों ने व्यक्ति-मारक बारूदी सुरंग प्रतिबन्ध सन्धि से हटने के बाद यह बात कही।

बारूदी सुरंग के इस्तेमाल, उनके भंडारण, उत्पादन और स्थानांतरण पर पूरी तरह से रोक लगाने वाली 1997 की इस सन्धि को ‘ओटावा कन्वेंशन’ के नाम से भी जाना जाता है।

संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODA) के अनुसार, निरस्त्रीकरण मामलों में यह सन्धि एक ऐतिहासिक वैश्विक समझौता साबित हुई है। इसके लागू होने के बाद से व्यक्ति-मारक बारूदी सुरंगों के वैश्विक उत्पादन में लगभग पूरी तरह से रोक लग चुकी है और इनके इस्तेमाल में भारी कमी आई है।

अभी तक 165 देश इस सन्धि का हिस्सा बन चुके हैं जबकि 133 देशों ने इस पर हस्ताक्षर किया है। अब तक चार करोड़ से अधिक संचित सुरंगों को नष्ट किया जा चुका है।

हाल ही में पाँच योरोपीय देशों (एस्टोनिया, फ़िनलैंड, लातविया, लिथुआनिया और पोलैंड) ने इस सन्धि से बाहर निकलने की योजना की घोषणा की है या फिर इस दिशा में क़दम उठाने की बात कही है। अनुमान है कि इन देशों ने रूस से जुड़ी सुरक्षा चिन्ताओं के चलते यह निर्णय लिया है।

इन देशों का नाम लिये बग़ैर ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने ऐसी घोषणाओं पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है। उनका कहना है कि ऐसे समय में जब आम नागरिक बढ़ते युद्धों के कारण ज़्यादा ख़तरे में हैं, यह और भी ज़रूरी हो जाता है कि हम उन ढाँचों को और मज़बूत करें, जो मानव जीवन व गरिमा की रक्षा करते हैं।”

महासचिव ने आगे कहा- “ये घोषणाएँ विशेष रूप से चिन्ताजनक हैं, क्योंकि इससे आम नागरिकों की सुरक्षा कमज़ोर पड़ सकती है और उस मानक फ़्रेमवर्क को भी नुक़सान पहुँच सकता है, जिसने बीते दो दशकों में अनगिनत जीवन बचाए हैं।”

इसके मद्देनज़र, उन्होंने सभी सदस्य देशों से मानवतावादी निरस्त्रीकरण सन्धियों का पालन करने और इससे पाँव वापिस खींचने की किसी भी प्रक्रिया को तत्काल रोकने का आग्रह किया है।

साथ ही, उन्होंने इस सन्धि के दायरे से बाहर 32 देशों से बिना विलम्ब किए इसमें शामिल होने की अपील की है। इनमें चीन, ईरान, इसराइल, रूस और संयुक्त राज्य अमरीका सहित अन्य देश हैं।

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