आनुवांशिक कारकों पर किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अवसाद होने की संभावना दोगुनी होती है। इस अध्ययन के लिए, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमरीका की महिलाओं और पुरुषों के आनुवंशिक डेटा का विश्लेषण किया।

नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, एक लाख 30 हज़ार महिलाओं और 65 हज़ार पुरुषों के आनुवंशिक आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। टीम ने दोनों लिंगों में अवसाद से जुड़े लगभग 7,000 डीएनए परिवर्तन पाए, साथ ही महिलाओं में अवसाद से जुड़े 6,000 अतिरिक्त डीएनए परिवर्तन भी पाए।
अपनी तरह के सबसे बड़े वैश्विक अध्ययन से पता चला है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अवसाद होने की संभावना दोगुनी होती है। महिलाओं में अवसाद के लिए केवल मनोवैज्ञानिक या सामाजिक ही नहीं है, बल्कि आनुवंशिक अंतर भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
महिलाओं में 6,133 विशिष्ट आनुवंशिक उत्परिवर्तन (Genetic Mutations) पाए गए जो पुरुषों में नहीं पाए गए, जबकि दोनों में 7,117 आनुवंशिक उत्परिवर्तन समान थे। अध्ययन के अनुसार, महिलाओं में अवसाद का मुख्य कारण मेटाबॉलिज़्म से जुड़े लक्षण हैं, जिनमें वज़न में उतार-चढ़ाव और ऊर्जा की कमी शामिल है।
नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित अध्ययन की प्रमुख लेखिका और क्यूआईएमआर बर्घोफर की शोधकर्ता जोडी थॉमस ने कहा, “हमें कुछ आनुवंशिक अंतर मिले हैं जो यह समझाने में मदद कर सकते हैं कि अवसाद से ग्रस्त महिलाओं में वजन में बदलाव या ऊर्जा के स्तर में बदलाव जैसे मेटाबोलिक संबंधी लक्षण अधिक क्यों होते हैं।”
शोध दल ने स्पष्ट किया कि डीएनए परिवर्तन आनुवंशिक अंतर हैं जो लोगों में जन्मजात होते हैं और इनका जीवन के अनुभवों से कोई लेना-देना नहीं है। दल ने आगे कहा कि हम यह भी जानते हैं कि अवसाद प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग रूप से प्रकट होता है। इस अध्ययन के लिए, हमने ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमरीका की महिलाओं और पुरुषों के आनुवंशिक डेटा का विश्लेषण किया।














