कृत्रिम बुद्धिमत्ता जिस तेज़ी से विकसित हो रही है, सरकारें उसके अनुरूप नियम और नीतियाँ बनाने में पिछड़ गई हैं। कुछ वर्ष पहले तक जो एआई जहाँ मुख्य रूप से सवालों के जवाब देने और लिखित सामग्री तैयार करने तक सीमित थी, आज वही कम्प्यूटर कोड लिख सकती है, विशाल डेटा का विश्लेषण कर सकती है, वास्तविक दिखने वाली तस्वीरें व वीडियो बना सकती है, नई दवाओं की खोज में मदद कर सकती है और बहुत कम मानवीय निगरानी में स्वतन्त्र रूप से काम भी कर सकती है।
जितनी तेज़ी से एआई की क्षमताएँ बढ़ी हैं, उसके सुरक्षित इस्तेमाल के लिए नियम और सुरक्षा उपाय उतनी तेज़ी से विकसित नहीं हो रहे हैं। यह निष्कर्ष कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतन्त्र अन्तरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल की बुधवार को जारी प्रारम्भिक रिपोर्ट में प्रस्तुत किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के प्रमुख एआई सुपरकम्प्यूटरों की लगभग तीन-चौथाई कम्प्यूटिंग क्षमता अमरीका के पास है, जबकि चीन की हिस्सेदारी क़रीब 15 प्रतिशत है। इस तरह दोनों देशों के पास मिलकर लगभग 90 प्रतिशत कम्प्यूटिंग क्षमता है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि एआई के प्रभावी वैश्विक नियमन का अवसर अभी मौजूद है, लेकिन यह खिड़की अधिक समय तक खुली नहीं रह सकती। जबकि ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल पर यह स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, वैज्ञानिक शोध, कृषि और विकलांगजन के लिए सुविधाएँ बेहतर बनाकर, विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति कर सकती है।
वहीँ पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना एआई से असमानता और ग़लत सूचना बढ़ सकती है, मानवाधिकारों व रोज़गार के लिए ख़तरा पैदा कर सकती है और शक्तिशाली प्रणालियों का नियन्त्रण कुछ ही सरकारों व कम्पनियों के हाथों में केन्द्रित कर सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती एआई के लाभों का पूरा इस्तेमाल करते हुए उसके बढ़ते जोखिमों को सीमित करना है।
शक्तिशाली कम्प्यूटिंग नैटवर्क, बड़ी मात्रा में प्रशिक्षण डेटा और बेहतर तकनीकों ने ऐसी AI प्रणालियाँ विकसित की हैं, जो सहजता से बातचीत कर सकती हैं, वैज्ञानिक समस्याओं का विश्लेषण कर सकती हैं, सॉफ़्टवेयर बना सकती हैं और वास्तविक जैसी दिखने वाली तस्वीरें, ऑडियो व वीडियो तैयार कर सकती हैं.
यह केवल निर्देशों का जवाब देने तक सीमित नहीं रही। उसके ‘एजेंट’ काम की योजना बना सकते हैं, डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं, सॉफ़्टवेयर लिख सकते हैं और बहुत कम या बिना मानवीय निगरानी के जटिल कार्य पूरे कर सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रणालियों द्वारा किए जा सकने वाले कार्यों की जटिलता हर कुछ महीनों में दोगुनी हो रही है। जिसका अंदाज़ा इन बिंदुओं से लगाया जा सकता है-
• चिकित्सा क्षेत्र में एआई ने 20 करोड़ से अधिक प्रोटीन की संरचनाओं का अनुमान लगा कर नई दवाओं और टीकों के विकास तथा एंटीबायोटिक प्रतिरोध पर शोध को तेज़ करने में मदद दी है।
• डॉक्टर स्तन कैंसर जैसी बीमारियों का जल्द पता लगाने के लिए एआई का प्रयोग कर रहे हैं। वहीं विकासशील देशों में स्वास्थ्यकर्मी, स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध एआई उपकरणों से मरीज़ों की देखभाल बेहतर बना रहे हैं।
• एआई आधारित पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ खाद्य असुरक्षा को संकट बनने से पहले पहचानने में मददगार हैं।
• ये वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाकर विकलांगजन के लिए तकनीक को अधिक सुलभ बना रही है और व्यक्तिगत शिक्षा व मानसिक स्वास्थ्य सहायता के अवसर बढ़ा रही है।
पैनल में विशेषज्ञ जिन बातों से चिन्तित हैं, वह इस प्रकार हैं-
अपराधी साइबर हमलों के लिए एआई का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर कर रहे हैं।
ऑनलाइन से महिलाओं और बच्चों को अधिक ख़तरा है क्यूंकि यह यौन शोषण सामग्री और अश्लील डीपफ़ेक जैसे दुरूपयोग से जुड़ा है।
एआई ऐसी झूठी जानकारी तैयार कर सकता है जो सच जितनी विश्वसनीय लगे। इससे सार्वजनिक बहस और लोकतान्त्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमज़ोर हो सकता है।
एआई प्रणालियाँ हानिकारक सोच या व्यवहार को बढ़ावा दे सकती हैं, जिससे गम्भीर मानसिक स्वास्थ्य संकट और आत्महत्या का जोखिम बढ़ सकता है।
एआई के अधिक स्वायत्त होने के साथ उसकी निगरानी और नियमन कठिन हो सकता है, विशेषकर जब मज़बूत सुरक्षा उपाय मौजूद न हों।
एआई को चलाने वाले डेटा केन्द्र बहुत अधिक ऊर्जा इस्तेमाल करते हैं, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बढ़ता है और वैश्विक तापमान वृद्धि तेज़ होती है।