नीलामी में बिके सबसे महंगे डायनासोर को लेकर क्यों चिंतित हैं वैज्ञानिक

‘डायनासोर की हड्डियां सिर्फ सजाने की चीज नहीं हैं।’ यह विचार हैं, मैकलेस्टर कॉलेज की वैज्ञानिक क्रिस्टी करी रोजर्स के। वह कहती हैं कि डायनासोर एक खुली किताब की तरह हैं, जिससे हमें लाखों साल पहले की पृथ्वी के बारे में पता चलता है। अगर कोई अमीर खरीदार अपनी मर्जी से किसी म्यूजियम को डायनासोर उधार भी दे दे, तो भी वैज्ञानिकों की परेशानी हल नहीं होती। विज्ञान का नियम है कि जो खोज एक वैज्ञानिक ने की है, उसे दूसरा वैज्ञानिक भी कभी भी परख सके। प्राइवेट घरों में रखे डायनासोरों के साथ ऐसा करना नामुमकिन हो जाता है।

नीलामी की दुनिया में इस समय एक खबर ख़ास चर्चा बटोर रही है। अमरीका के सॉथबीज ऑक्शन हाउस ने तक़रीबन 6.7 करोड़ साल पुराने ‘टी-रेक्स’ डायनासोर की नीलामी हुई। मंगलवार को नीलाम गस (Gus) नाम के इस डायनासोर की बिक्री मात्र दस मिनट में हो गई। ऑक्शन हाउस के लिए यह नीलामी एक बड़ी कामयाबी हो सकती है लेकिन विज्ञान की दुनिया इसे एक बहुत बुरी खबर की तरह देख रही है।

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के मुताबिक़, इस बिक्री के बारे में लोगों का अंदाजा था कि नीलामी की बोली 30 मिलियन डॉलर तक जा सकती है। भारतीय करेंसी में यह तकरीबन 288.59 करोड़ रुपये हुई। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के वैज्ञानिक थॉमस होल्ट्ज ने बताया कि यह सचमुच एक बहुत ही शानदार और विज्ञान के लिए बेहद जरूरी ढांचा है।

मगर यहाँ का नज़ारा बिलकुल ही अलग दिखा। हुआ यह कि दुनिया भर के अरबपतियों के बीच इसे खरीदने की ऐसी होड़ मची कि महज दस मिनट के अंदर एक गुप्त खरीदार ने इसे 50.1 मिलियन डॉलर में खरीद लिया। यह रक़म करीब 482 करोड़ रुपये बनती है।

इस डायनासोर की नीलामी को ऑक्शन हाउस भले ही बड़ी कामयाबी मान रहा हो, लेकिन विज्ञान की दुनिया के लिए इसे एक बहुत बुरी खबर की तरह देखा जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब ऐसे दुर्लभ कंकाल पब्लिक म्यूजियम के बजाय अरबपतियों के निजी ड्राइंग रूम की शोभा बनेंगे तो उन पर भविष्य में होने वाली रिसर्च के रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे।

इस बिकवाली से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह इतिहास का अब तक का सबसे महंगा बिकने वाला कंकाल बन गया है। नीलामी की कीमत इतनी ज्यादा है कि इस बजट में करीब 100 फरारी रोमा कारें खरीदी जा सकती हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, गस कोई मामूली डायनासोर नहीं है। यह दुनिया के सबसे खतरनाक मांसाहारी डायनासोर टी-रेक्स (Tyrannosaurus rex) का ढांचा है। रिपोर्ट बताती हैं कि इस अनोखे ढांचे को अमरीका के साउथ डकोटा के एक फार्म से खोजा गया था।

इस ढांचे के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बेहद खास है। इसके पूरे ढांचे में 183 असली हड्डियां है जो पूरे आकर का 61% हैं। यह इसे बेहद दुर्लभ बनती है। शेष गायब हड्डियों की जगह नकली हड्डियां लगाकर इस को ऐसे अंदाज़ में खड़ा किया गया है, जैसे यह अपने शिकार के पीछे तेजी से दौड़ रहा हो।

पहले के समय में मिले किसी भी डायनासोर को सरकारी म्यूजियम में रखा जाता था ताकि बच्चे और बड़े उसे देख सकें। लेकिन साल 1997 में पहली बार सू (Sue) नाम के एक टी-रेक्स को नीलामी में बेचा गया।

सॉथबीज की अधिकारी कैसेंड्रा हैटन ने मीडिया से बताया कि उस समय कोर्ट के फैसलों से यह साफ हुआ कि जिसकी जमीन होगी, जमीन से निकलने वाले डायनासोर पर भी उसी का मालिकाना हक होगा। इसके बाद से डायनासोरों को बेचने का एक बड़ा बाजार बन गया।

रिपोर्ट्स से पता चलता है कि सरकारी म्यूजियम के पास इतनी राशि नहीं होती है कि नीलामी में इन अमीर अरबपतियों का मुकाबला कर सकें। नतीजा यह होता है कि डायनासोर किसी अमीर आदमी के घर की शोभा बन जाते हैं और आम लोग या वैज्ञानिक उन्हें कभी देख नहीं पाते। इसी सिलसिले में साल 2024 में ‘एपेक्स’ नाम के एक डायनासोर की बिक्री हुई और एक अमीर बिजनेसमैन ने इसे 44.6 मिलियन डॉलर (429.12 करोड़ रुपये) में खरीदा।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट बताती है कि सॉथबीज नीलामी घर ग्राहकों को लुभाने के लिए गस के जबड़े पर बने छेदों को ‘दूसरे टी-रेक्स के काटने के निशान’ बता रहा है। वे कहानी बना रहे हैं कि गस ने कभी खतरनाक लड़ाई लड़ी होगी। लेकिन कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक स्टुअर्ट सुमीडा इस बात को गलत मानते हैं। उनके मुताबिक, ‘काटने के निशान नुकीले और आड़े-तिरछे होते हैं। गस की हड्डियों पर बने छेद बिल्कुल गोल और साफ हैं। इसका मतलब है कि टी-रेक्स को कोई इन्फेक्शन या दांतों की बीमारी रही होगी।’

रिपोर्ट के मुताबिक़, वैज्ञानिक सुमीडा मजाकिया लहजे में कहते हैं, ‘इसे लड़ाई का घाव बताना ज्यादा रोमांचक लगता है, लेकिन असलियत यह है कि इस टी-रेक्स के मुंह से बहुत गंदी बदबू आती होगी और उसे मसूड़ों की बीमारी थी।’

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