पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों पर लगभग 92.6 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। इसे अबतक के इतिहास में सबसे अधिक प्रतिशत माना जा रहा है। पहले चरण के मतदान में ऐतिहासिक भागीदारी के साथ कई इलाकों में हिंसा की छिटपुट घटनाएं भी दर्ज की गई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक़, 1951 के बाद राज्य में हुए इस चुनाव में अब तक का सबसे अधिक मतदान हुआ। इससे पहले चार महीने तक मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के परिणामस्वरूप मतदाताओं की संख्या में लगभग 12% की कमी आई।
राजनीतिक विश्लेषक और राजनीतिक दल मतदान के इस प्रतिशत पर साथ इसके संकेतों को अभी तक डिकोड नहीं कर पा रहे हैं। इतने अधिक मतदान से जुड़ा जो सबसे ख़ास पहलू चर्चा में है, उसके मुताबिक़, साल 2011 में रिकॉर्ड 85.55% वोटिंग हुई थी तब तब सत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिला था।
याद दिला दें कि पन्द्र सात पहले होने वाली इस रिकॉर्ड वोटिंग में 34 साल पुरानी लेफ्ट फ्रंट सरकार सत्ता से बेदखल हो गई थी। चुनाव के नतीजों के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस बंगाल की सत्ता में आई थी।
साल 2011 की बात करें तो उस समय विधानसभा चुनावों में 85.55% वोटिंग हुई जबकि साल 2024 के लोकसभा चुनावों में 79.8% के साथ बढ़ोत्तरी देखने को मिली। हालांकि इस बार की विधानसभा वोटिंग प्रतिशत ने पिछले सभी आंकड़े फेल कर दिए।
इस बार चुनाव को लेकर वोटर्स में जबरदस्त उत्साह देखा गया है। यहां कुल 3.60 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 1.75 करोड़ महिला वोटर शामिल थीं। मतदान के आंकड़े बताते हैं कि दक्षिण दिनाजपुर में सबसे ज्यादा मतदान हुआ। इसके बाद कूचबिहार, बीरभूम, मुर्शिदाबाद, जलपाईगुड़ी, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम का आता है। इन जिलों में मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं।
मतदान में दक्षिण दिनाजपुर सबसे आगे रहा, जहां 94.98% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसके बाद कूच बिहार में 94.75% और बीरभूम में 93.88% मतदान दर्ज किया गया। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के अनुसार, अंतिम आंकड़े आने पर मतदान प्रतिशत में और वृद्धि होने की उम्मीद है। पहले चरण के मतदान से 294 सदस्यीय राज्य विधानसभा की 152 सीटों पर 1,478 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का इस बारे में मत है कि जब भी ज्यादा मतदान होता है वो बदलाव की इच्छा को दर्शाता है, लेकिन वह इसे सत्ता के समर्थन का संकेत भी मान रहे हैं। उनके अनुसार साल 2011 में बम्पर मतदान से सत्ता परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हुआ था, लेकिन हर चुनाव का संदर्भ अलग होता है।
बहरहाल अब सभी की नजरें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा, जब कोलकाता और उसके आसपास की 142 सीटों पर मतदान होगा। वोटों की गिनती 4 मई को होगी।