ब्रिटेन चुनाव: बोरिस जॉनसन की पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी

बोरिस जॉनसन की कंजरवेटिव पार्टी ने ब्रिटेन के आम चुनावों में बहुमत हासिल कर लिया है. ब्रेक्जिट को मुख्य मुद्दा बनाकर चुनाव में उतरी बोरिस जॉनसन की पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने से ब्रेक्जिट का रास्ता अब साफ हो गया है.ब्रिटेन में हुए आम चुनावों के नतीजे अब स्पष्ट हो गए हैं. बोरिस जॉनसन और उनकी पार्टी की सत्ता में वापसी हुई है.

जॉनसन की कंजरवेटिव पार्टी ने 650 सदस्यों वाली संसद में बहुमत के लिए जरूरी 326 के आंकड़े को पार कर लिया है. अब तक आए रुझानों से कंजरवेटिव टोरी पार्टी को 364 सीटें मिलती दिख रही हैं. वहीं विपक्षी लेबर पार्टी इस बार भी सत्ता पाने में नाकाम रही है. अभी के रुझानों के मुताबिक लेबर पार्टी को 203 सीटें मिलती दिख रही हैं. 2017 में हुए मध्यावधि चुनावों में लेबर को 261 सीटें मिली थीं. वहीं कंजरवेटिव पार्टी को तब बहुमत से 10 कम यानी 316 सीटें मिली थीं. दूसरी पार्टियों की बात करें तो स्कॉटलैंड नेशनल पार्टी को 47, लिबरल डेमोक्रेट्स को 12, डीयूपी को 8, एसएफ को 7, पीलेड को 4, ग्रीन को 1 और अन्य पार्टियों को तीन सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं. हालांकि ओपिनियन पोल में इस बार भी त्रिशंकु नतीजों के कयास लगाए गए थे, जो गलत साबित हुए.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इन नतीजों का स्वागत करते हुए कहा है कि उन्हें ब्रेक्जिट को लागू करने और ब्रिटेन को यूरोपीय संघ से अलग करने के लिए जनादेश मिला है. अब वो ब्रिटेन को यूरोपीय संघ से अलग करने और ब्रिटिश संघ को मजबूती देने का काम करेंगे. वहीं लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन ने इन नतीजों को निराशाजनक बताया है और इसे लेबर पार्टी के लिए एक काली रात की तरह कहा है. हार के साथ की कॉर्बिन ने भविष्य में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी से इनकार भी किया है. लिबरल डेमोक्रेट्स की नेता जो स्विंसन 159 वोटों के अंतर से अपनी सीट पर चुनाव हार गई हैं. लिबरल डेमोक्रेट्स का कहना है कि वो अब अपना एक नया नेता चुनेंगे.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बोरिस जॉनसन को जीत पर बधाई दी है. ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि यूके और यूएस अब एक नई और बड़ी ट्रेड डील कर सकेंगे. यूरोपीय संघ के नेताओं ने भी ब्रिटेन के चुनाव नतीजों का स्वागत किया है. ऑस्ट्रिया के चांसलर सेबास्टियान कुर्त्स ने बोरिस जॉनसन को जीत की बधाई देते हुए कहा कि इस जीत से ब्रेक्जिट अब आसानी से हो सकेगा और ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के अच्छे संबंध बने रहेंगे.

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