एक नई आकाशीय रिसर्च बताती है कि टाइटन के ध्रुवीय समुद्रों में लिक्विड का कंपोज़िशन बदलता रहता है। नदियाँ तटों के पास मीथेन से भरपूर लिक्विड पहुँचाती हैं, जबकि खुले समुद्रों में इथेन ज़्यादा होता है। कैसिनी स्पेसक्राफ्ट के बाइस्टैटिक रडार डेटा से सतह के बारे में ये बारीक जानकारियाँ मिलीं।
सूरज से लगभग 1.4 अरब किलोमीटर दूर और मंगल और बृहस्पति से आगे, शनि के एक चंद्रमा पर मौसम का एक चक्र मौजूद है। वहाँ बारिश होती है। नदियाँ उसकी सतह को काटती हुई बहती हैं। झीलें सौ मीटर से भी ज़्यादा गहरी हैं। यह पृथ्वी के जुड़वाँ जैसा लगता है ज़रूर है मगर इसमें फ़र्क इतना है कि यहाँ चलने वाला “पानी” का चक्र असल में लिक्विड मीथेन है, जो नाइट्रोजन से भरपूर घने नारंगी वायुमंडल के नीचे मौजूद है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित, नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के अनुसार, टाइटन सौर मंडल में पृथ्वी के अलावा एकमात्र ऐसी जगह है जिसके बारे में हमें पता है कि वहाँ की सतह पर स्थिर लिक्विड मौजूद है। 2017 में टाइटन के पास से कैसिनी के आखिरी करीबी फ़्लाईबाय (उड़ान) से पुष्टि हुई कि चंद्रमा की कुछ उत्तरी झीलें 100 मीटर से भी ज़्यादा गहरी हैं; इनमें बारिश का पानी आता है और वे धीरे-धीरे खाली होती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसा ज़मीन के नीचे मौजूद चैनलों के ज़रिए होता है, ठीक वैसे ही जैसे पृथ्वी पर चूना पत्थर (लाइमस्टोन) से पानी रिसकर सिंकहोल बनाता है।
नतीजे बताते हैं कि नदियों के मुहाने या एस्चुअरी (जहाँ मीथेन से भरपूर पानी समुद्र में गिरता है) में रडार रिफ्लेक्शन, खुले समुद्र के मुकाबले अलग थे। ये नतीजे इस बात की पुष्टि करते हैं कि मीथेन की बारिश तट के पास इथेन की ज़्यादा मात्रा वाले समुद्र के पानी को पतला कर रही है; ठीक वैसे ही जैसे पृथ्वी पर मीठे पानी की नदियाँ समुद्र से मिलने पर खारे पानी वाले इलाके बनाती हैं।
यह खोज टाइटन के अनोखे मीथेन-आधारित मौसम चक्र के बारे में हमारी समझ को और गहरा करती है। ये नतीजे अंतरिक्ष में दिलचस्प केमिस्ट्री को सपोर्ट करने की टाइटन की क्षमता को उजागर करते हैं।