यूएई में हर साल बहुत कम बारिश होती है। इस समस्या से निपटने के लिए संयुक्त अरब अमीरात में बारिश के लिए एक नया प्लान तैयार किया गया है। इस योजना के तहत आर्टिफिशियल बारिश से पानी की कमी को दूर किया जाएगा।
पानी की इस गंभीर कमी से निपटने के लिए यूएई क्लाउड सीडिंग को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नैनोटेक्नोलॉजी को मिलाकर अपनी जल सुरक्षा रणनीति को आगे बढ़ा रहा है। नेशनल सेंटर ऑफ़ मेटियोरोलॉजी (NCM) बारिश को 30-35% तक बढ़ाने के लिए एआई-संचालित मॉडल, ड्रोन और खास नैनोमटेरियल का इस्तेमाल करता है।
आर्टिफिशियल बारिश से पहले पर्यावरण के अनुकूल रिसर्च की जाएगी, क्लाउड सीडिंग (आर्टिफिशियल बारिश) प्रोजेक्ट्स के लिए 1.5 मिलियन डॉलर की रिसर्च ग्रांट जारी की गई है। इस काम को अंजाम देने के लिए यूनाइटेड स्टेट्स, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के साइंटिस्ट रिसर्च करेंगे।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, अमीरात नेशनल सेंटर ऑफ़ मेट्रोलॉजी के तहत तीन साइंटिस्ट चुने गए हैं। अगले 3 सालों तक बारिश बढ़ाने के लिए मॉडर्न टेक्नोलॉजी पर रिसर्च की जाएगी। इन वैज्ञानिकों को 48 देशों से मिले 140 प्रपोज़ल में से चुना गया, हर चुने गए साइंटिस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा 1.5 मिलियन डॉलर की ग्रांट दी जाएगी।
रिसर्च ग्रांट को तीन सालों में बांटा जाएगा। एक साइंटिस्ट को एक साल में ज़्यादा से ज़्यादा 550,000 डॉलर दिए जाएंगे। आर्टिफिशियल बारिश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है।
अमीराती अधिकारियों के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सही बादलों को चुनेगा और बेहतर नतीजे हासिल करेगा। यूएई में हर साल बहुत कम बारिश होती है और देश का ज़्यादातर समुद्री पानी डीसैलिनेट करके निकाला जाता है।
गौरतलब है कि यूएई पहले से ही हर साल सैकड़ों क्लाउड सीडिंग करता है। अमीराती अधिकारियों के मुताबिक, नई रिसर्च से खेती और पानी के रिसोर्स बेहतर हो सकते हैं।









