एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि मेडिकल इमेजिंग यानी एक्स-रे सहित सभी परीक्षण, जिनमें विकिरण शरीर से होकर गुजरता है, कराए जाने पर बच्चों में ब्लड कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

अमरीका की यूसी सैन फ्रांसिस्को और यूसी डेविस यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पाया कि मेडिकल इमेजिंग से निकलने वाला रेडिएशन बच्चों में ब्लड कैंसर का बड़ा कारण हो सकता है। यह स्टडी न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुई है।
रिसर्च टीम ने कनाडा और अमरीका के करीब 40 लाख बच्चों और किशोरों के मेडिकल रिकॉर्ड का अध्ययन किया। उन्हें चौंकाने वाले नतीजे मिले। स्टडी में सामने आया कि बच्चों में पाए जाने वाले कुल ब्लड कैंसर के लगभग 10 प्रतिशत मामले मेडिकल इमेजिंग से हुए रेडिएशन से जुड़े हो सकते हैं। अध्ययन बताता है कि करीब 3,000 केस सिर्फ इसी वजह से सामने आए।
एक अनुमान के अनुसार शोधकर्ताओं का कहना है कि, ब्लड कैंसर से पीड़ित दस में से एक बच्चे में इस घातक बीमारी का निदान इमेजिंग स्कैन के कारण होता है।हालांकि ज़्यादातर मामलों में जान बचाने के लिए मेडिकल इमेजिंग ज़रूरी है, लेकिन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए विकिरण के संपर्क को कम रखना भी एक महत्वपूर्ण नियंत्रण है।
विशेषज्ञों ने इस अध्ययन के लिए 1996 और 2016 के बीच छह अमरीकी और कनाडाई स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों में पैदा हुए लगभग 37 लाख बच्चों की समीक्षा की।रक्त कैंसर के 3,000 मामलों के आकलन से जुड़े इस अध्ययन में पाया गया कि सीटी स्कैन से बढ़े हुए विकिरण स्तर से बच्चों को सबसे ज़्यादा खतरा था।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, बच्चों का शरीर विकास के दौर में होता है, इसलिए उनकी कोशिकाएं रेडिएशन के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं। ऐसे में ब्लड कैंसर, जिसमें ल्यूकेमिया और लिम्फोमा शामिल हैं, बच्चों में सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। साथ ही उनके सामने लंबी जिंदगी होती है, जिससे कैंसर होने का जोखिम और बढ़ जाता है।
शोधकर्ताओं ने अध्ययन में यह भी पाया कि जिन बच्चों ने एक या दो सीटी स्कैन करवाए थे, उनमें रक्त कैंसर का खतरा 80 प्रतिशत बढ़ गया था, जबकि एक्स-रे से रक्त कैंसर का खतरा अपेक्षाकृत कम था। सीटी स्कैन में रेडिएशन की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। रिसर्च में पाया गया कि सिर्फ एक या दो हेड सीटी स्कैन कराने से ब्लड कैंसर का खतरा लगभग दोगुना हो जाता है। वहीँ जिन बच्चों ने कई बार सीटी स्कैन कराए, उनमें यह खतरा तीन गुना तक बढ़ गया।
इससे बचाव के बारे में बात करते हुए शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर डॉक्टर और अस्पताल अनावश्यक स्कैन से बचें और जहां जरूरी हो, वहां भी कम से कम रेडिएशन डोज दें, तो बच्चों में कैंसर के करीब 10 प्रतिशत मामले नियंत्रित किए जा सकते हैं। इसके अलावा, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई जैसी जांचें ज्यादा सुरक्षित विकल्प हैं क्योंकि इनमें आयोनाइजिंग रेडिएशन नहीं होता है।










