ट्रम्प ने इस्राईल को खुश करने के लिए बैतुल मुक़द्दस को अपनी जागीर समझकर फिलिस्तीन पर ज़ुल्म किया

 अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने शुरू से ही इस्राईल के पक्ष में खुलकर बयानबाज़ी की और बड़े क़दम उठाए।

वह उन्होंने वह सब कुछ किया जो उनके पूर्ववर्ती नहीं कर पाए थे। बैतुल मुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी घोषित करना और अरब देशों पर इस्राईल से खुलकर संबंध रखने के लिए भारी दबाव डालना।

इस्राईल को ख़ुश करने के लिए युनेस्को से बाहर निकल जाना, संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार परिषद के ख़िलाफ़ कड़वा रुख़ अपनाना यह सब कुछ ट्रम्प ने इस्राईल को खुश करने के लिए किया है। लेकिन ट्रम्प ने इसके साथ ही अनजाने में इस्राईल को जमकर नुक़सान भी पहुंचाया है और अब भी पहुंचा रहे हैं।

ओबामा शासन काल में वाइट में कई साल तक बड़े पदों पर असीन रह चुके डेरेक शोलेट ने अपने एक लेख में ट्रम्प के प्रेम से इस्राईल को पहुंचने वाले नुक़सान गिनवाए हैं। उनका कहना है कि अब तक इस्राईल के समर्थन पर अमरीका की दोनों पार्टियां एकमत थीं लेकिन बहुत जल्द यह स्थिति इतिहास बनने वाली है।

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने बैतुल मुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी घोषित करके शांति प्रक्रिया में तो कई मदद नहीं की लेकिन उनके इस क़दम से एक चीज़ यह हुई है कि इस्राईली सरकार और वहां की स्ट्रैटेजिक कम्युनिटी में ट्रम्प के लिए बड़ा प्रेम भर गया है। यह चीज़ देखने में अच्छी लगती है लेकिन अमरीका इस्राईल संबंधों के लिए नई चुनौती पैदा हो गई है।

इस्राईली अधिकारी यह कहते हुए सुने जाते हैं कि ओबामा का शासन काल बड़ा त्रासदीपूर्ण रहा इस काल में अमरीका मध्यपूर्व से बाहर निकला और ईरान का प्रभाव बढ़ गया। अरब बसंत से लेकर ईरान परमाणु डील तक हम मामले में अमरीका और इस्राईल के बीच मतभेद गहरे होते चले गए। लेकिन इसके साथ इस्राईल और अमरीका के बीच सामरिक और इंटेलीजेन्स सहयोग भी जारी रहा। आयरन डोम मिसाइल ढाल व्यवस्था में सहयोग, इस्राईल को आधुनिक हथियारों की सप्लाई और एफ़-35 विमानों से इस्राईली वायु सेना को लैस करना इस संदर्भ में कुछ उदाहरण हैं।

ट्रम्प ने इस्राईली अधिकारियों को बहुत खुश किया है लेकिन यह भी एक ज़मीनी सच्चाई है कि यह इस्राईल अमरीका संबंधों के लिए गंभीर चिंता का मामला है। क्योंकि इस्राईल के संबंध में ट्रम्प की नीतियों के बारे में अमरीका के भीतर मतभेद पैदा हो गया है। हर डेमोक्रेटिक नेता अपना असंतोष जता रहा है।

इस्राईल अमरीका संबंधों की मज़बूती उसकी बुनियाद की मज़बूती पर निर्भर है जबकि संबंधों की नींव में दरार पड़ने के चिन्ह साफ़ दिखाई देने लगे हैं। इसकी शुरुआत ईरान परमाणु समझौते के ख़िलाफ़ कांग्रेस में इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू के भाषण से हो गई थी लेकिन अब यह स्थिति और भी भयानक रूप धारण कर चुकी है।

इस समय इस्राईल समर्थक होने की पहिचान ट्रम्प के क़रीबी रिपब्लिकन नेताओं तक सीमित हो गई है। इस प्रकार के रिश्ते से इस्राईल को फ़ायदा नहीं पहुंचने वाला है और यह इस्राईली नेतृत्व के लिए बड़ी मूर्खता की बात होगी कि वह इस स्थिति को हवा दे। डेमोक्रेटिक नेताओं की अगली पीढ़ी ओबामा शासन काल की कड़वाहट को याद रखेगी।

इसी लिए कहते हैं कि मूर्ख मित्र अक़्लमंद दुशमन से ज़्यादा ख़तरनाक होता है!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *