देशभर में आज स्वतंत्र श्रमिक संगठनों और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आम हड़ताल का एलान किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों के कर्मचारी केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

आज के भारत बंद में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करने का फैसला लिया है। वहीँ बिहार राज्य में इंडिया गठबंधन ने चक्का जाम का ऐलान किया है। इस हड़ताल में विभिन्न क्षेत्रों के कर्मचारी केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी 17 मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
एक ओर ट्रेड यूनियंस 25 करोड़ श्रमिकों को लेकर भारत को कामयाब बनाने में जुटी है। इस बीच बिहार सहित देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक टकराव की आशंका है। प्रदर्शनकारी संगठन केंद्र सरकार की उन नीतियों का विरोध कर रहे हैं, जिन्हें वे मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक मानते हैं।
ट्रेड यूनियंस के मुताबिक, देशभर में बैंकों, बीमा दफ्तरों और कोयला खदानों के बंद रहने का आह्वान किया गया है, वहीं बिहार की सड़कों पर आम जनजीवन के प्रभावित होने की पूरी संभावना है। भारत बंद का असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ने की सम्भावना है। बिजली क्षेत्र से जुड़े 27 लाख से अधिक कर्मचारी इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होने जा रहे हैं, जिससे कई राज्यों में बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है।
केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध देशभर में श्रमिकों और कर्मचारियों केंद्रीय श्रमिक संगठनों और स्वतंत्र यूनियनों की अपील पर बुलाई गई इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में बैंक, डाक सेवा, परिवहन, कोयला, निर्माण, और अन्य क्षेत्रों के लाखों कर्मचारी भाग ले रहे हैं। हड़ताल का उद्देश्य केंद्र सरकार की उन नीतियों का विरोध करना है जिन्हें श्रमिक संगठन ‘श्रमिक विरोधी’ और ‘जनविरोधी’ मानते हैं।
हड़ताल को लेकर प्रदर्शनकारियों की कुल 17 प्रमुख मांगें हैं। इनमें न्यूनतम वेतन, स्थायी रोजगार, निजीकरण पर रोक, और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
हड़ताल कारण बैंकिंग और डाक सेवाएं प्रभावित रहने की संभावना है। अन्य कई सार्वजनिक सेवाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, रेलवे यूनियनों ने इस हड़ताल में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है, लेकिन वे आंदोलन को नैतिक समर्थन दे रही हैं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपने रूट की स्थिति की जानकारी अवश्य लें।
इस बार हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और कृषि श्रमिक यूनियनों के संयुक्त मंच का भी समर्थन प्राप्त है। इनके सहयोग से ग्रामीण इलाकों में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन और सड़कों पर जाम की रणनीति बनाई गई है।
हड़ताल का नेतृत्व कर रहे केंद्रीय ट्रेड यूनियन और किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार की नीतियां मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक हैं। इन लोगों ने सरकार के सामने अपनी 9 प्रमुख मांगें रखी हैं।
1. चार नई श्रम संहिताओं को वापस लिया जाए।
2. युवाओं के लिए रोजगार सृजन और सरकारी रिक्तियों को तुरंत भरा जाए।
3. 26,000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन की गारंटी दी जाए।
4. पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल किया जाए।
5. 8 घंटे के कार्यदिवस की गारंटी दी जाए।
6. मनरेगा (MGNREGA) को शहरी क्षेत्रों तक बढ़ाया जाए।
7. अग्निपथ योजना को रद्द किया जाए।
9. हड़ताल और यूनियन बनाने के अधिकार की रक्षा की जाए।
10. स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत किया जाए।
