बिहार में शुरू हुआ 7.89 करोड़ मतदाताओं की सूची का पुनरीक्षण, महागठबंधन ने किया चक्का जाम

भारत निर्वाचन आयोग की निगरानी में बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के तहत एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का प्रत्येक योग्य नागरिक मतदाता सूची में दर्ज हो सके और कोई भी नाम छूटने न पाए।

बिहार में शुरू हुआ 7.89 करोड़ मतदाताओं की सूची का पुनरीक्षण, महागठबंधन ने किया चक्का जाम

महागठबंधन ने आज बिहार में विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) के खिलाफ राज्यभर में चक्का जाम का एलान किया है। इस आंदोलन में आरजेडी, कांग्रेस, वामपंथी दल, वीआईपी पार्टी और जन अधिकार पार्टी समेत सभी सहयोगी दल शामिल हैं।

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ‘बिहार बंद’ पर कहा- “चुनाव आयोग एक राजनीतिक दल का अंग बन गया है। क्या गुजरात के दो लोग तय करेंगे कि कौन सा बिहारी वोटर वोट दे सकता है और कौन नहीं?”

उन्होंने आगे कहा- “चुनाव आयोग ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है। गरीब लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की बड़े पैमाने पर तैयारी चल रही है। पहले उनके नाम हटाए जा रहे हैं, फिर उनकी पेंशन और उनके राशन भी छीन लिए जाएंगे।”

निर्वाचन आयोग की निगरानी में इस अभियान में 24 जून को जारी आदेश के तहत करीब 7.89 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं का निरीक्षण किया जाएगा। निर्वाचन आयोग द्वारा भरे गए गणना प्रपत्र वाला विवरण प्रत्येक पंजीकृत मतदाता तक पहुंचाने की व्यवस्था की है। इसमें शामिल हैं, इसमें नाम, पता और पुरानी फोटो जैसे विवरण शामिल हैं।

बताते चलें कि अब तक 97.42 प्रतिशत मतदाताओं को फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं और यह 7.69 करोड़ नागरिकों को कवर करता है। बताते चलें कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधार के लिए दावे और आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि पहली सितंबर है। इस दौरान पात्रता के दस्तावेज भी अलग से प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ बीएलओ घर-घर जाकर इन फॉर्मों को इकट्ठा करने के साथ यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई मतदाता छूटे नहीं। इसका पहला दौरा पूरा हो चुका है, जबकि दूसरा दौरा जारी है। इस दौरान कई मतदाता मृत, स्थानांतरित या प्रवासी भी पाए गए हैं।

ऐसे नागरिक जिन्होंने 25 जुलाई तक अपने गणना फॉर्म जमा किए हैं, उनके नाम पहली अगस्त को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे। सीईओ, डीईओ, ईआरओ और बीएलओ यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वृद्ध, बीमार, दिव्यांग और गरीब जैसे कमजोर वर्गों के मतदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके लिए वालंटियरों का सहयोग लिया जा रहा है।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 और 19 तथा संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार, यदि कोई भी भारतीय नागरिक जो अर्हता तिथि को 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का है, सामान्यतः उस क्षेत्र का निवासी है और किसी कानून के तहत अयोग्य नहीं ठहराया गया है, मतदाता सूची में शामिल होने का पात्र है।

इस विशेष पुनरीक्षण अभियान का मक़सद यह सुनिश्चित करना है कि बिहार में प्रत्येक योग्य मतदाता की भागीदारी लोकतंत्र में सुनिश्चित की जा सके। सूची से किसी भी नागरिक का नाम हटाने का निर्णय केवल जांच के बाद ही लिया जाएगा। इसके लिए ईआरओ को स्पष्ट, लिखित आदेश देना होगा। यदि किसी व्यक्ति की पात्रता पर संदेह होता है, तो उसे नोटिस देकर उसका पक्ष सुना जाएगा। इसके बाद ही किसी प्रकार की बहिष्कार कार्रवाई होगी।

ऐसे में अगर कोई मतदाता ईआरओ के फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह पहले जिला मजिस्ट्रेट के पास अपील कर सकता है। वहां से भी राहत न मिलने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 24 के तहत राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास दूसरी अपील की जा सकती है।

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