अमरीका के राष्ट्रीय पर्यावरण सूचना केन्द्रों के अनुसार, वैश्विक सतही तापमान 20वीं सदी के औसत से 1.32 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। वर्ष 1850 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद यह अब तक का सबसे गर्म अगस्त दर्ज किया गया।
इस वर्ष अगस्त का महीना दुनिया भर में रिकॉर्ड में दर्ज अब तक का सबसे गर्म अगस्त रहा। नए मौसम आँकड़ों के अनुसार, उत्तरी गोलार्ध में गर्मियों का मौसम अब तक का सबसे गर्म रहा जबकि दक्षिणी गोलार्ध में सर्दियों का मौसम भी रिकॉर्ड के सबसे गर्म स्तरों में शामिल रहा।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने शुक्रवार को बताया कि इस असाधारण गर्मी का असर दुनिया भर में देखा गया। धरती पर रिकॉर्ड गर्मी की पुष्टि योरोपीय संघ की कॉपरनिकस जलवायु सेवा, अमरीका के राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) और नासा की मासिक रिपोर्टों में की गई है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि वैश्विक समुद्री सतह का औसत तापमान अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच चुका है। मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशान्त महासागर के बड़े हिस्सों में अल-नीनो के प्रभाव से रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया। उष्णकटिबंधीय चक्रवात गतिविधि औसत से अधिक रही और 19 उष्णकटिबंधीय तूफ़ान दर्ज किए गए। रिपोर्ट्स बताती हैं कि अगस्त में आर्कटिक और अंटार्कटिक, दोनों क्षेत्रों में समुद्री बर्फ़ का फैलाव औसत से कम रहा।
तापलहरें और सूखा
मध्य और पूर्वी योरोप के बड़े हिस्सों में भी अगस्त में सूखे जैसी स्थितियाँ रहीं, जो कुछ इलाक़ों में मई से ही बनी हुई थीं। पश्चिमी योरोप में अगस्त के दौरान तापलहरें चलीं और मई से जारी असाधारण गर्मी का दौर बरक़रार रहा। फ्राँस, हंगरी, रोमानिया, सर्बिया और ब्रिटेन में गम्भीर सूखे की स्थिति दर्ज की गई।
योरोप की प्रमुख नदियों – राइन, डेन्यूब, सदर्न बग और नीपर में जल प्रवाह असाधारण रूप से कम दर्ज किया गया।
इतनी गर्मी क्यों
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, अगस्त में दर्ज रिकॉर्ड गर्मी के प्रमुख कारणों में अल-नीनो भी शामिल था। इस जलवायु रुझान ने वैश्विक उष्णकटिबंधीय चक्रवात गतिविधि को प्रभावित किया और कुछ देशों में भारी वर्षा व बाढ़ की स्थिति पैदा हुई।
वहीं, कुछ अन्य देशों में सूखे की स्थिति रही। कॉपरनिकस वायुमंडल निगरानी सेवा (CAMS) के अनुसार, अल-नीनो ने इंडोनेशिया में मौसमी जंगल की आग को और भड़काने में भी भूमिका निभाई।
आँकड़े बताते हैं कि अब तक दर्ज 10 सबसे गर्म अगस्त, वर्ष 2016 के बाद ही आए हैं। नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, अगस्त में वैश्विक औसत सतही वायु तापमान पूर्व-औद्योगिक काल के अनुमानित स्तर से 1.65 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।
अमरीका के राष्ट्रीय पर्यावरण सूचना केन्द्रों के अनुसार, वैश्विक सतही तापमान 20वीं सदी के औसत से 1.32 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। वर्ष 1850 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद यह अब तक का सबसे गर्म अगस्त दर्ज किया गया।
अल-नीनो के प्रभाव को लेकर आने वाले महीनों में जो पूर्वानुमान हैं वह भी चिन्ताजनक हैं। डब्ल्यूएमओ के नवीनतम अल-नीनो अपडेट के अनुसार, “अल-नीनो अब पूरी तरह स्थापित हो चुका है और आने वाले महीनों में इसके बेहद प्रबल होने की सम्भावना है। इसका असर वर्ष 2027 तक व्यापक रूप से वर्षा और तापमान के पैटर्न पर देखने को मिल सकता है।”
वैश्विक जलवायु की निगरानी
दुनिया भर की कई संस्थाएँ वैश्विक जलवायु से जुड़े आँकड़ों पर नज़र रखती हैं और उनका विश्लेषण करती हैं।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) अपनी वैश्विक जलवायु स्थिति रिपोर्ट तैयार करने के लिए कॉपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा, NOAA, NASA और अन्य संस्थाओं से प्राप्त आँकड़ों का इस्तेमाल करता है।
संयुक्त राष्ट्र की यह मौसम एजेंसी, नवम्बर में तुर्की के अन्ताल्या में होने वाले COP31 जलवायु सम्मेलन में इस वर्ष की वैश्विक जलवायु स्थिति पर नवीनतम जानकारी पेश करेगी।