सीईआरटी-इन यानी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम ने शुक्रवार को अपनी एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट बताती है कि दुनिया डिजिटल से क्वांटम इकोनॉमी बनने की ओर एक बड़े बदलाव के मोड़ पर खड़ी है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब संयुक्त राष्ट्र ने 2025 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ क्वांटम साइंस एंड टेक्नोलॉजी वर्ष घोषित किया है

क्वांटम मेकैनिज्म के सिद्धांतों का इस्तेमाल करने वाले क्वांटम कंप्यूटर, अब रिसर्च लैब से बाहर की वास्तविक दुनिया में उपयोग में आ रहे हैं। इसकी तस्दीक भारत की राष्ट्रीय साइबर एजेंसी द्वारा ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी फर्म एसआईएसए के सहयोग से संकलित आंकड़े से होती है।
इस रिपोर्ट का शीर्षक है- ‘ट्रांजिशनिंग टू क्वांटम साइबर रेडीनेस’। आंकड़े बताते हैं कि क्वांटम कंप्यूटिंग अब एक भविष्यवादी विचार नहीं, बल्कि साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर गहरा प्रभाव डालने वाली एक तेजी से उभरती सच्चाई है।
संयुक्त राष्ट्र ने 2025 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ क्वांटम साइंस एंड टेक्नोलॉजी वर्ष घोषित किया है, जो दर्शाता है कि ग्लोबल कम्युनिटी इस बदलाव को कितनी गंभीरता से ले रहा है। सेमीकंडक्टर से लेकर सिस्टम सॉफ्टवेयर तक क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़ा इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि क्वांटम कंप्यूटर, जो क्वांटम मेकैनिज्म के सिद्धांत अब रिसर्च लैब से बाहर निकलकर वास्तविक दुनिया में उपयोग में आ रहे हैं। दिसंबर 2024 में लॉन्च हुई गूगल की विलो चिप ने 105 क्यूबिट के साथ एरर करेक्शन में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भी कई ग्लोबल टेक कंपनियों ने पहले ही शानदार प्रगति कर ली है।
इनमे माइक्रोसॉफ्ट ने फरवरी 2025 में अपना मेजराना-1 प्रोसेसर पेश किया, जिसका लक्ष्य दस लाख क्यूबिट तक विस्तार करना है। आईबीएम का लक्ष्य 2029 तक फॉल्ट-टोलरेंट सिस्टम बनाना है और क्वांटिनम ने रिकॉर्ड तोड़ परिशुद्धता के साथ 56-क्यूबिट ट्रैप्ड-आयन क्वांटम कंप्यूटर बनाया है। रिपोर्ट बताती है कि नोकिया भी क्वांटम नेटवर्किंग के क्षेत्र में अग्रसर है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब संयुक्त राष्ट्र ने 2025 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ क्वांटम साइंस एंड टेक्नोलॉजी वर्ष घोषित किया है, जो दर्शाता है कि ग्लोबल कम्युनिटी इस बदलाव को कितनी गंभीरता से ले रहा है। सेमीकंडक्टर से लेकर सिस्टम सॉफ्टवेयर तक क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़ा इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है।
क्वांटम कंप्यूटिंग के साथ साइबर सुरक्षा जोखिम भी है। रिपोर्ट बताती है कि क्वांटम कंप्यूटिंग में अपर क्षमताएं अपार क्षमताएं होने के साथ गंभीर साइबर सुरक्षा जोखिम भी हैं। आज की मशीनों की तुलना में क्वांटम कंप्यूटर जटिल समस्याओं को तेजी से हल कर सकते हैं, जिसका मतलब यह भी है कि वे मौजूदा एन्क्रिप्शन मेथड को ब्रेक कर सकते हैं। आरएसए जैसे एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम, जिनका वित्तीय लेनदेन, मैसेजिंग ऐप, डिजिटल साइन और यहां तक कि ब्लॉकचेन सिस्टम की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में इन्हें आसानी से क्रैक किया जा सकता है।
रिपोर्ट में इसे एक बड़ी चुनौती भी बताया गया है। इससे बड़े पैमाने पर डेटा ब्रीच हो सकता है। वहीँ रिपोर्ट से यह बात भी सामने आई है कि कई संगठनों को अभी भी अपने मौजूदा क्रिप्टोग्राफिक सिस्टम की स्पष्ट जानकारी नहीं है। ऐसे में भविष्य में जब भी पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की ज़रूरत होगी, उस समय ये ब्लाइंड स्पॉट्स घातक हो सकते हैं।
