अंतरिक्ष की गहराइयों में अरबों प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक डबल-रिंग रेडियो संरचना की खोज की गई है। खगोलविदों द्वारा खोजी गई इस संरचना को अब तक ज्ञात सबसे शक्तिशाली और सबसे दूरस्थ ‘विषम रेडियो वृत्त’ बताया जा रहा है।

अपनी इस खोज के ज़रिए खगोल वैज्ञानिकों ने 7.7 अरब साल पहले निकली उस रोशनी को डिटेक्ट किया है जो धरती तक आज पहुंची है। इस रोशनी ने एक ऐसा रेडियो सर्कल दर्शाया है जो अब तक खोजे गए सभी विषम रेडियो सर्किल (Odd Radio Circles) में सबसे ताकतवर और सबसे विशाल है। वैज्ञानिकों ने इसे J131346.9+500320 नाम दिया है।
वैज्ञानिकों ने पहली बार छह साल पहले इन रहस्यमय वृत्तों को देखा था और अब यह पुष्टि हो गई है कि इनका व्यास हमारी आकाशगंगा मिल्की वे से दस से बीस गुना बड़ा है।
इस खोज से जुड़ी सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि जो रेडियो सिग्नल अब हमें मिला, वह उस समय निकला था जब हमारी धरती का वजूद भी नहीं था। यानी ये दृश्य ब्रह्मांड के इतिहास का बेहद पुराना स्नैपशॉट है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन दो गोलाकार रिंग्स की चौड़ाई करीब 9.78 लाख प्रकाश-वर्ष है, और इनके चारों तरफ एक हल्का रेडियो हेलो फैला हुआ है।
ये रेडियो सर्किल वास्तव में रेडियो ऊर्जा के विशाल और धुंधले वृत्त होते हैं जो कुछ आकाशगंगाओं के आसपास पाए जाते हैं और केवल रेडियो तरंगदैर्ध्य पर ही देखे जा सकते हैं। ये उच्च गति वाले चुंबकीय प्लाज्मा द्वारा निर्मित होते हैं।
इस संरचना की चौड़ाई लगभग 9.78 लाख प्रकाश वर्ष है और यह एक सुपरमैसिव ब्लैक होल के कारण हुई गैलेक्टिक टक्कर से उत्पन्न मानी जा रही है। यह खोज आकाशगंगाओं के विकास और ब्लैक होल की गतिशीलता के बारे में एक नया नजरिया प्रस्तुत करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले शोध बताते हैं कि ऐसी संरचनाएँ संभवतः सुपरमैसिव ब्लैक होल या आकाशगंगाओं के टकराव से उत्पन्न शॉक वेव्स द्वारा निर्मित होती हैं।











