बच्चों की हत्या को कभी भी किसी भी क़ीमत पर सही नहीं ठहराया जा सकता- संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फ़रीदा शहीद

ईरान के मिनाब में 28 फ़रवरी को एक स्कूल पर किए गए जानलेवा हवाई हमले की संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने जाँच कराए जाने की मांग की है। मध्य पूर्व में युद्ध से उत्पन्न स्थिति पर शुक्रवार को जिनीवा में मानवाधिकार परिषद (HRC) में सदस्य देशों और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों ने ‘त्वरित चर्चा’ के लिए बैठक में शिरकत की है। इस चर्चा का विषय था- “ईरान के मिनाब में शजारेह तैयबेह बालिका स्कूल पर हवाई हमले, जो अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून और अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून का गम्भीर उल्लंघन हैं।”

मानवाधिकार परिषद की त्वरित बैठक को सम्बोधित करते हुए वोल्कर टर्क ने उन छात्राओं की हत्याओं की निन्दा की है। उन्होंने न्याय स्थापित किए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए संयुक्त राज्य अमरीका के सैन्य अधिकारियों से, मिनाब स्कूल पर हुए हमले की जाँच के नतीजे फ़ौरन प्रकाशित करने का भी आहवान किया है।

वार्ता को स्थाई शान्ति के लिए एक मात्र रास्ता उबताते हुए उन्होंने तमाम पक्षों से टकराव को तत्काल रोकने और बातचीत की तरफ़ लौटने का भी आग्रह किया। यूएन मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा, “देशों के बीच चाहे जो भी मतभेद हों, हम सभी इस बात पर सहमत हो सकते हैं कि उनका समाधान स्कूली बच्चों की हत्या करके नहीं निकाला जा सकता।”

उन्होंने कहा, “मिनाब में, शजारेह तैयेबेह प्राथमिक बालिका स्कूल पर बमबारी ने हृदयविदारक तबाही की है. बमबारी में तबाह हुई कक्षाओं और पीड़ित अभिभावकों की तस्वीरों ने दिखाया है कि युद्ध की सबसे भारी क़ीमत किन्हें चुकानी पड़ती है. इस मामले में यह क़ीमत उन 168 लोगों ने चुकाई जिनमें बच्चे, अध्यापक, स्कूल स्टाफ़ और उनके प्रियजन शामिल हैं.”

स्कूल पर हमला ‘कोई ग़लतफहमी नहीं- ईरान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरग़ची ने ज़ोर देकर कहा है कि शजारेह तैयबेह स्कूल पर हमला, जानबूझकर किया गया था और यह कोई “ग़लतफ़हमी” या चूक नहीं थी। ईरानी विदेश मंत्री ने, वीडियो लिंक के माध्यम से मानवाधिकार परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा, “इस क्रूरता को न्यायोचित नहीं ठहराया जासकता, इसे छुपाया नहीं जा सकता, और इस पर चुप्पी या उदासीनता नहीं बरती जा सकती।”

इस चर्चा के दौरान अब तक स्पेन सहित हर वक्ता ने, स्कूल पर हमले और बच्चों की हत्या की निन्दा की है। स्पेन के प्रतिनिधिमंडल ने कहा, “हमें बमबारी के माध्यम से बच्चों की हत्या को युद्धों के ‘ग़ैर-इरादतन नुक़सान’ (collateral damage) के रूप में मामूली नहीं बताना चाहिए. जब आप एक स्कूल को नष्ट करते हैं, तो आप एक पूरी पीढ़ी के भविष्य को नष्ट कर देते हैं।”

शिक्षा के अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत (Special Rapporteur) फ़रीदा शहीद ने कहा कि स्थानीय समयानुसार सुबह 11:45 बजे, जब स्कूल में कक्षाएँ चल रही थीं, एक अमरीकी टॉमहॉक मिसाइल,मिनाब के प्राथमिक विद्यालय पर गिरी. इसमें कम से कम 175 लोग मारे गए, जिनमें से अधिकांश बच्चे थे जिनकी आयु 7 से 12 वर्ष के बीच थी।

फ़रीदा शहीद का कहना है कि पूरे ईरान में युद्ध के दौरान 1,000 से अधिक नागरिक मारे गए हैं; तीस लाख लोग विस्थापित हुए हैं, और अस्पतालों तथा विश्व धरोहर स्थलों को नष्ट कर दिया गया है। उन्होंने मानवाधिकार परिषद से कहा, “बच्चों की हत्या को कभी भी, किसी भी क़ीमत पर सही नहीं ठहराया जा सकता।”

संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ या विशेष रैपोर्टेयर जिनीवा स्थित मानवाधिकार परिषद द्वारा विशिष्ट शासनादेशों पर जाँच-पड़ताल करते हैं और मानवाधिकार परिषद को रिपोर्ट देते हैं। हालाँकि न तो ये यूएन कर्मचारी होते हैं और न ही उन्हें उनके काम के लिए, संयुक्त राष्ट्र की तरफ़ से कोई भुगतान दिया जाता है।

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