जत्था वापस लिया है, दिल्ली मार्च नहीं- किसान नेता

अपनी मांगों को लेकर शंभू बॉर्डर से दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों को पुलिस ने रोक दिया है। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बैरिकेड पर चढ़ने की कोशिश की है। जवाब में पुलिस ने इनपर आंसू गैस के गोले छोड़े।जत्था वापस लिया है, दिल्ली मार्च नहीं- किसान नेतापुलिस द्वारा की जाने वाली इस कार्यवाई में 6 लोग घायल हो गए हैं। इस पुलिस टकराव पर किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने किसानों के पैदल जत्थे से वापस आने को कहा है।

प्रदर्शन कर रहे ये किसान दिल्ली कूच पर अड़े हुए हैं। वहीँ इस विरोध-प्रदर्शन पर हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने किसानों द्वारा अनुमति लिये जाने का सवाल उठाया है। उनका कहना है कि बिना अनुमति के उन्हें दिल्ली कैसे जाने दे सकते हैं।

दूसरी तरफ शंभू बॉर्डर पर किसान नेता सरवन सिंह पंधेर का कहना है कि उन्होंने जत्था वापस लिया है, दिल्ली मार्च नहीं। आगे उन्होंने 6 किसानों के घायल होने की बात भी कही है। किसान यूनियनें बैठक करेंगी और पैदल मार्च के भविष्य की रणनीति तय करने के लिए पीसी कॉन्फ्रेंस बुलाएंगी।

इस बीच एएनआई के सोशल मीडिया हैंडल से जानकारी मिली है कि किसानों के दिल्ली की ओर मार्च के मद्देनजर हरियाणा के अंबाला में कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं हैं।

इन परिस्थितियों पर किसान नेता सरवन सिंह पंधेर का कहना है कि अब 101 किसानों का जत्था 8 दिसंबर को दोपहर 12 बजे दिल्ली की ओर कूच करेगा। उन्होंने बताया कि आने वाले कल के दिन केंद्र सरकार से बातचीत के लिए रखा गया है।

बताते चलें कि संयुक्त किसान मोर्चा ने 101 किसानों के दिल्ली कूच से खुद को अलग कर लिया है। भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी का कहना है कि इस पैदल मार्च के लिए उनसे संपर्क नहीं किया गया है और न ही उनसे सलाह ली गई। इसलिए वे इस पैदल मार्च में सम्मिलित नहीं होंगे।

किसान नेता पंधेर चाहते हैं कि सरकार से बातचीत हो। उनका कहना है कि बातचीत के लिए तैयार हैं, इसलिए हम कल तक इंतजार करेंगे। हम। आगे उन्होंएने बटाया कि वह सरकार से टकराव नहीं चाहते।

प्रदर्शन कर रहे किसान एमएसपी सहित कृषि लोन माफी, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं, किसानों के खिलाफ पुलिस मामलों को वापस लेने तथा 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।

किसानों की मांगों में भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को बहाल करना और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा देना भी शामिल है।

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