कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होती हैं तो सरकार कीमतों के निर्धारण पर उचित निर्णय लेगी सरकार

भारत में आज भी पेट्रोल और डीजल के दाम में अभी कोई बदलाव नहीं हुआ मगर अमरीका और ईरान के वार्ताकार शांति समझौते के मौजूदा फ्रेमवर्क को देखते हुए यह उम्मीद लगाईं जा रही है। दरअसल अमरीका और ईरान के वार्ताकार शांति समझौते के चलते इंटरनेशनल क्रूड ऑयल मार्केट में कीमतें नरम हुईं हैं। इसके नतीजे में आज सुबह स्टेंडर्ड ब्रेंट क्रूड कुछ सस्ता ही हुआ है।

इस आधार पर कुछ जानकारों का मानना है कि अमरीका और ईरान के बीच चल रही बातचीत की कुछ अच्छी बातें निकल कर सामने आईं हैं। ऐसे में संकेत मिले हैं कि दोनों देश के वार्ताकार अगले 60 दिनों के अंदर एक कंप्रिहेंसिव पीस एग्रीमेंट (Comprehensive peace agreement) पर पहुंच जाएंगे। इससे इंटरनेशनल क्रूड मार्केट में कुछ नरमी दिखी।

भारत की बात करें तो यहाँ पेट्रोल-डीजल बेचने वाली सरकारी तेल कंपनियों ने बुधवार, 24 जून 2026, को भी दाम में कोई बदलाव नहीं किया। यहां बीते 25 मई के बाद दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालाँकि आज सुबह स्टेंडर्ड माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड के दाम में कुछ गिरावट दिखी।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सवाल पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने कहा कि एक बार कीमतें स्थिर हो जाए तो सरकार और तेल कंपनियां विचार करेंगी। उन्‍होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अगर पेट्रोलियम प्राइस, कच्चे तेल की कीमत स्टेबलाइज कर जाए, स्थिर हो जाए तो धीरे-धीरे सरकार विचार करेगी, कंपनी विचार करेगी कि क्या होना चाहिए।’

मौजूदा स्थितियों पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि अब शांति की ओर संकेत मिल रहे हैं और ‘तूफान’ थम चुका है। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतों में महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई है, जो इस बात का प्रमाण है कि संकट के दौरान भारत ने सही तरीके से मुकाबला किया।

रिपोर्ट के मुताबिक़, डॉ लाहिड़ी ने एक गंभीर तथ्य की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत अपनी 85% कच्चा तेल आयात करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस निर्भरता को कम करने के लिए अब ‘एनर्जी सेल्फ-सफिशिएंसी’ यानी ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करना अनिवार्य है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने तीन महत्वपूर्ण विकल्पों का प्रस्ताव दिया-
रिन्युएबल एनर्जी (Renewable Energy): नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर अधिक से अधिक ध्यान देना।
एक्सप्लोरेशन (Exploration): घरेलू स्तर पर तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देना।
डायवर्सिफिकेशन (Diversification): पेट्रोलियम उत्पादों के आयात के स्रोतों को किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित न रखकर विविधतापूर्ण बनाना।

इन विकल्पों को उन्होंने इसलिए जरूरी बताता ताकि भविष्य में जियो-पॉलिटिकल तनावों से होने वाले व्यवधानों की स्थिति में भारत अन्य देशों से निर्बाध रूप से आपूर्ति प्राप्त कर सके। पेट्रोल, डीजल, गैस की कीमतें कम होने की संभावना पर उन्‍होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होती हैं, तो सरकार और संबंधित कंपनियां धीरे-धीरे कीमतों के निर्धारण पर उचित निर्णय ले सकेंगी।

गौरतलब है कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव बीतने के बाद ही पेट्रोलियम कंपनियों ने बीते मई महीने में चार बार दाम बढ़ा चुकी है। यह बढ़ोत्तरी महज 11 दिनों में हुई है। सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा सबसे पहले 15 मई 2026 को पेट्रोल 3 रुपये और डीजल 3.29 पैसे महंगा किया था। इसके बाद 19 मई को पेट्रोल 87 पैसे तो डीजल 91 पैसे, 23 मई 2026 को पेट्रोल 87 पैसे तो डीजल 91 पैसे और 25 मई 2026 को पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये महंगा किया था। उसके बाद दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

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