वज़न घटाने वाली नई दवाओं के उपयोग पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दुनिया भर में मोटापे की दर में चिन्ताजनक वृद्धि को देखते हुए इन दिशा-निर्देशों को वैश्विक स्वास्थ्य नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वयस्कों में 30 या उससे अधिक बीएमआई को मोटापा माना जाता है। डब्ल्यूएचओ ने इस सप्ताह जारी अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया भर में बढ़ रही मोटापे की समस्या केवल दवाओं से हल नहीं होगी। मोटापा हर साल लाखों रोके जा सकने वाली मौतों का कारण बन रहा है और दुनिया में एक अरब से अधिक लोग इससे प्रभावित हैं।
मोटापे को दीर्घकालिक और बार-बार लौटने वाली बीमारी बताते हुए संगठन ने इसके उपचार के लिए GLP-1 थेरेपी को मंजूरी दी है। ये दवाएं रक्त शर्करा कम करती हैं, वजन घटाने में मदद करती हैं और हृदय व गुर्दे की जटिलताओं के जोखिम को भी कम करती हैं।
डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी ये दिशा-निर्देश, GLP-1 therapies नामक उपचार श्रृंखला पर केन्द्रित है, जिसमें लिराग्लूटाइड, सेमाग्लूटाइड और टिरज़ेपाटाइड (liraglutide, semaglutide and tirzepatide) जैसी दवाएँ शामिल हैं।
गौरतलब है कि इन दवाओं की वैश्विक मांग बढ़ने से नकली और घटिया उत्पादों का फैलाव भी बढ़ा है, जिससे मरीजों की सुरक्षा और भरोसे पर खतरा पैदा हो गया है।
इसी कारण WHO ने पहली बार लंबे समय तक मोटापा प्रबंधन में GLP-1 दवाओं के उपयोग पर दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें तीन प्रमुख दवाओं—लिराग्लूटाइड, सेमाग्लूटाइड और टिर्ज़ेपाटाइड—पर विशेष सिफारिशें दी गई हैं।
इनमें, सशर्त सलाह समेत इन दवाओं के लम्बे समय तक सुरक्षित रूप से, प्रयोग के बारे में जानकारी दी गई है। बताते चलें कि GLP-1 थैरेपीज़, एक प्राकृतिक हार्मोन की नक़ल करके भूख, ब्लड शुगर और पाचन को नियंत्रित करती हैं।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग मोटापे से ग्रस्त हैं। मोटापे से जुड़ी बीमारियों के कारण वर्ष 2024 में करीब 37 लाख लोग मौत के शिकार हो गए।
डब्ल्यूएचओ ने आगाह किया है कि अगर कड़े क़दम नहीं उठाए गए तो 2030 तक मोटापे से प्रभावित लोगों की संख्या दोगुनी हो सकती है। इससे स्वास्थ्य प्रणालियों पर भारी दबाव पड़ेगा साथ ही अनुमान है कि वैश्विक आर्थिक हानि 3 ट्रिलियन डॉलर प्रति वर्ष तक पहुँच सकती है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने मोटापे को एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बताते हुए कहा कि हालाँकि केवल दवाएँ इस वैश्विक स्वास्थ्य संकट को हल नहीं कर सकतीं, लेकिन GLP-1 थैरेपीज़, लाखों लोगों को, मोटापे पर क़ाबू पाने और इससे जुड़े ख़तरों को कम करने में मदद कर सकती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ज़ोर देकर कहा है कि मोटापा, केवल जीवनशैली का परिणाम नहीं है, बल्कि यह एक जटिल, दीर्घकालिक स्वास्थ्य स्थिति की वजह से भी होता है, जिसमें अनुवंशिक बनावट, माहौल, जैविकी और सामाजिक परिस्थितियाँ शामिल हैं।
