देश के एक फीसदी धनवान के पास 11.6 लाख करोड़ डॉलर की संपत्ति

भारत के सबसे धनी परिवार और भी अधिक अमीर होने वाले हैं। इससे धन प्रबंधकों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि देखी जा रही है। इन अमीरों की तरल संपत्तियों में बैंक जमा और गैर-प्रवर्तकों के इक्विटी शेयर शामिल हैं।

देश के एक फीसदी धनवान के पास 11.6 लाख करोड़ डॉलर की संपत्ति

देश में अमीर और ज्यादा अमीर होते जा रहे हैं। यहाँ शीर्ष एक फीसद बेहद अमीर परिवारों के पास लगभग 11.6 लाख करोड़ डॉलर की कुल संपत्ति है। देश के पूंजी बाजारों में तेजी भी इस प्रवृत्ति मेंयोगदान दे रही है।

बर्नस्टीन की एक रिपोर्ट से पता चला है कि भारत के सबसे अमीर परिवार और भी अधिक अमीर होने वाले हैं। इससे धन प्रबंधकों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि देखी जा रही है।

रिपोर्ट से यह भी मालूम हुआ है कि बेहद अमीर एक फीसद परिवारों के पास लगभग 11.6 लाख करोड़ डॉलर की कुल संपत्ति है। इसमें से लगभग 2.7 लाख करोड़ डॉलर तरल वित्तीय संपत्तियों (liquid financial assets) में हैं। इनकी बढ़ती वित्तीय परिसंपत्तियां धन प्रबंधन फर्मों के लिए बड़े अवसर पैदा कर रही हैं।


भारत में आर्थिक असमानता और धन के केंद्रीकरण से संबंधित एक रिपोर्ट से पता चला है कि भारत के शीर्ष एक फीसद अति अमीर परिवारों के पास अब लगभग 11.6 लाख करोड़ डॉलर की संपत्ति है, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा 2.7 लाख करोड़ डॉलर तरल वित्तीय संपत्तियों में रखा गया है।


रिपोर्ट से पता चलता है कि अति धनवान लोग आईपीओ और ब्लॉक डील के माध्यम से प्रमोटर होल्डिंग्स को तरल वित्तीय संपत्ति में बदल रहे हैं। ये लोग पूंजी बाजार में तेजी का फायदा उठा रहे हैं। इसके अलावा स्टार्टअप इकोसिस्टम से धनी व्यक्तियों का एक नया वर्ग उभर रहा है। जानकारी के मुताबिक़, इसमें संस्थापक और शुरुआती कर्मचारी शामिल हैं, जिससे उच्च मूल्य वाले व्यक्तियों (एचएनआई) की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है।

इन अमीरों की तरल संपत्तियों में बैंक जमा और गैर-प्रवर्तकों के इक्विटी शेयर शामिल हैं। भारतीय परिवार धीरे-धीरे अपनी बढ़ती बचत और धन का ज्यादा हिस्सा वित्तीय संपत्तियों में स्थानांतरित कर रहे हैं।

अत्यधिक धनी लोगों का बढ़ता दायरा अपने बढ़ते वित्तीय पोर्टफोलियो के प्रबंधन के लिए पेशेवर सलाहकार की सेवा ले रहा है। हालांकि, वर्तमान सलाहकार बाजार में असंगठित कंपनियों और पारंपरिक बैंकों का ही दबदबा है।

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