हाल ही में नई दिल्ली में लक्मे फैशन वीक का आयोजन हुआ। यह महज़ फैशन का सप्ताह नहीं था बल्कि कल्पनाशीलता की सख़्त जाँच बना। राजधानी नई दिल्ली में आयोजित अन्तिम दौर में 6 प्रतिभागियों ने टिकाऊ फ़ैशन के अपने डिज़ाइनर परिधान और उत्पाद प्रस्तुत किए, जिन्होंने देखने वालों को हैरत में डाल दिया।

भारत में संयुक्त राष्ट्र की साझेदारी में R|Elan सर्कुलर डिज़ाइन चुनौती के सीज़न 7 ने भारत, योरोप और अमरीका के उभरते डिज़ाइनरों के साथ जिस एक सवाल पर काम किया, वह था-अगर अपशिष्ट अन्त नहीं, शुरुआत हो तो?
इस प्रतिस्पर्धा के 7वें संस्करण में शामिल होने वाले दस से अधिक देशों से 190 से अधिक आवेदक एक लक्ष्य के साथ मंच पर उतरे थे, जो था– उस चुनौती को जीतना जो फ़ैशन की दुनिया को बदल रही है।
भविष्य को आकार दे रहे इन परिवर्तकों में से प्रत्येक ने नवाचार, शिल्प और प्रभाव की अनूठी कहानी प्रस्तुत की। इस आयोजन में लन्दन, मिलान, मुम्बई और एशिया–प्रशान्त क्षेत्रों से आई अनगिनत प्रविष्टियों में से ऐसे 6 डिज़ाइनरों को चुना गया। जो परिपत्रता (circularity) को केवल नारा न समझकर इसे सिलाई की हर परत में सिद्ध कर सकें।
आवेदनों का मूल्यांकन संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और इंटेलकैप की सर्कुलर एपेरेल इनोवेशन फ़ैक्ट्री (Circular Apparel Innovation Factory, CAIF) के साथ विकसित मापदंडों के आधार पर किया गया।
इनके तहत, वास्तविक “लूप बन्द” डिज़ाइन, सामाजिक प्रभाव, संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य (SDGs) से सामंजस्य और विस्तारयोग्य क्षमता जैसे मानदंड शामिल थे।
भारत में संयुक्त राष्ट्र के रैज़िडेंट कोऑर्डिनेटर शॉम्बी शार्प ने इस अवसर पर कहा, “यह फ़ैशन का भविष्य है, जहाँ नवाचार और रचनात्मकता मिलकर ऐसे डिज़ाइन रचते हैं जिनके केन्द्र में परिपत्रता है।”
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में विजेताओं की घोषिणा की गई। जिसमे सर्कुलर डिज़ाइन चुनौती 2025 की विजेता रहीं, वर्शनी बी (CRCLE), वहीं Golden Feathers के राधेश अग्रहरी को उपविजेता चुना गया।
2018 में शुरुआत के बाद से ही, सर्कुलर डिज़ाइन चुनौती (CDC), वैश्विक स्तर पर अपने परिपत्र नवाचारों को प्रदर्शित करने के लिए टिकाऊ फ़ैशन में उभरती प्रतिभाओं के लिए एक अग्रणी मंच बन गया है।
ने आयोजन ने सन्देश दिया कि मार्गदर्शन, बाज़ार पहुँच और प्रचार के माध्यम से यह कार्यक्रम अगली पीढ़ी के ऐसे लीडर को सामने लाता है जो उद्योग में परिपत्रता के दृष्टिकोण को पुनः परिभाषित कर रहे हैं।
