अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की अचानक मौत

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का आज सुबह निधन हो गया है। उनकी उम्र 38 वर्ष थी। उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए केजीएमयू भेजा गया है। अभी तक उनकी मृत्यु का कारन पता नहीं चल सका है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि परिवार के करीबी लोगों से मिली जानकारी से पता चला है कि अचानक तबीयत खराब होने की वजह से प्रतीक यादव को लखनऊ स्थित सिविल अस्पताल लाया गया था। यहाँ डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।

समाजवादी पार्टी की ओर से अपने एक्स हैंडल पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई है। इसमें लिखा है, “श्री प्रतीक यादव जी का निधन ह्रदय विदारक है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। विनम्र श्रद्धांजलि।”

मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे प्रतीक यादव भारतीय जनता पार्टी की नेता अपर्णा यादव के पति थे। साधना गुप्ता का निधन साल 2022 में हुआ था। प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव बीजेपी की नेता हैं और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं।

प्रतीक यादव का शव पोस्टमार्टम के लिए केजीएमयू भेजा गया है। जहाँ वरिष्ठ डाक्टरों की निगरानी में उनका पोस्टमॉर्टम किया जाएगा।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए एक्स हैंडल पर संदेश में लिखा, “उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, ‘पद्म विभूषण’, स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव जी के पुत्र एवं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती अपर्णा यादव जी के पति श्री प्रतीक यादव जी का आकस्मिक निधन अत्यंत दुःखद है। विनम्र श्रद्धांजलि। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं।”

कैसे थे प्रतीक यादव
लीड्स यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई करने वाले प्रतीक यादव कई जिम और हेल्थ सेंटर चलाते थे। उन्होंने साल 2011 में अपर्णा बिष्ट से शादी की थी। राजनीति किनारा रखने वाले प्रतीक लो-प्रोफाइल जीवन पसंद करते थे।

प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव राजनीति में सक्रिय रही हैं। उन्होंने अपने अपने करियर की शुरुआत समाजवादी पार्टी से की थी, लेकिन साल 2022 में वह भाजपा में शामिल हो गईं।

प्रतीक यादव इससे ने ताज होटल से 1090 चौराहा तक आवारा कुत्तों के समर्थन में एक रैली में भाग लिया था और सुप्रीम कोर्ट से ‘कोई भी अमानवीय निर्णय न लेने’ का आग्रह किया था। साथ ही उन्होंने लोगों से पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रमों और संगठनों का समर्थन करने तथा उन्हें सशक्त बनाने की अपील भी की थी।

उनका मानना था कि पशु जन्म नियंत्रण पर काम किया जाए, न कि कैद पर। उनके अनुसार अगर हम पशु जन्म नियंत्रण पर काम करें और अगले 10 सालों में उनकी आबादी को कम करने का लक्ष्य रखें, तो सरकार को यही करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *