बिहार में 5 लाख से ज्यादा डुप्लीकेट मतदाता के नाम हटाने में नाकाम रहा एसआईआर- एडीआर

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स का आरोप है कि बिहार में किया गया एसआईआर 5 लाख डुप्लीकेट वोटर्स को हटाने में नाकाम रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग को फटकार लगाई है।

बिहार में 5 लाख से ज्यादा डुप्लीकेट मतदाता के नाम हटाने में नाकाम रहा एसआईआर- एडीआर

एडीआर द्वारा लगाए गए इस आरोप पर शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को इस आरोप का जवाब देने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत का कहना है कि चुनाव आयोग को अपने सारे दस्तावेज तैयार रखने होंगे।

सुप्रीम कोर्ट में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स एनजीओ की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने यह बात रखी। प्रशांत भूषण ने अपनी बात में कहा कि एनजीओ की तरफ से योगेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट में एक प्रेजेंटेशन के जरिए अक्टूबर में जो डुप्लीकेट नाम बताए थे, वे फाइनल वोटर लिस्ट में अब भी मौजूद हैं।

गौरतलब है कि यह तब की बात है जब चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया पूरी कर ली थी। प्रशांत भूषण ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग वोटर लिस्ट पर डुप्लीकेशन हटाने वाला सॉफ्टवेयर चलाने से मना कर रहा है जबकि वह आयोग के पास है।

बिहार की वोटर लिस्ट गड़बड़ी से जुड़े इस मामले में एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट शोएब आलम का कहना है कि चुनाव कराने और उनकी देखरेख की पूरी जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है, लेकिन आयोग अपने तय कानूनी अधिकारों से आगे नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को वही करना चाहिए जो कानून में लिखा है।

बिहार में एसआईआर की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि अगर यह सॉफ्टवेयर चला दिया जाए तो 5 लाख डुप्लीकेट वोटर हट जाएंगे। साथ ही उन्होंने यह आरोप भी लगाया है कि चुनाव आयोग ने यह नहीं बताया कि उसने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के लिए क्या तरीका अपनाया है।

बेंच ने वकील की बात सुनने के बाद चुनाव आयोग के वकील एकलव्य द्विवेदी से कहा कि चुनाव आयोग को इन तथ्यात्मक पहलुओं का जवाब देना होगा। अपने रिकॉर्ड तैयार रखें।

अदालत ने यह भी कहा कि इलेक्शन कमीशन को यह साबित करना होगा कि उसने एसएआर के लिए खुद बनाए नियमों और कायदों का पूरी तरह से पालन किया है। जवाब में एकलव्य द्विवेदी का कहना था कि चुनाव आयोग द्वारा एक एफिडेविट फाइल किया गया है जिसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के नियम, कायदों और निर्देशों का पालन किया गया है।

प्रशांत भूषण ने उन्होंनेकहा कि एसआईआर का उद्देश्य विदेशी और अवैध प्रवासियों को वोटर लिस्ट से हटाना था। लेकिन, चुनाव आयोग के पास न तो संवैधानिक, न ही कानूनी और न ही न्यायिक अधिकार है कि वह किसी वोटर की नागरिकता तय कर सके।

आगे कहा कि अगर किसी बूथ लेवल ऑफिसर को किसी मतदाता की नागरिकता पर शक होता है, तो चुनाव आयोग उस मामले को सक्षम अथॉरिटी को भेज सकता है। ऐसे में जब तक वह अथॉरिटी कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाती, जिस पर कोर्ट में अपील की जा सके, तब तक चुनाव आयोग उस व्यक्ति को वोटर लिस्ट से नहीं हटा सकता। यदि वह एफिडेविट देकर खुद को भारतीय नागरिक बताता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *